पटना :
सामाजिक, आर्थिक और जातीय जनगणना की प्रारूप सूची के प्रकाशन में बिहार देश के कई राज्यों से आगे चल रहा है। बिहार मेें सामाजिक, आर्थिक और जातीय जनगणना अब से तीन साल पहले शुरू हुई। केंद्रीय सहायता से जनगणना को पूरा करने का प्रावधान है लेकिन राशि के अभाव में कर्मचारियों के वेतन लटकने लगे। राज्य सरकार ने जनगणना कार्यों में तेजी के लिए अपने फंड से राशि मुहैया करायी और काम आगे बढ़ पाया। योजनाआें का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन राज्य सरकार के सुशासन के कारण संभव हो पा रहा है। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार अबतक 26 जिलों में सामाजिक, आर्थिक और जातीय जनगणना के प्रारूप की सूची प्रकाशित कर दी गयी है। अब इन जिलों में आपत्तियों का निष्पादन हो रहा है। वहीं शेष 12 जिलों में इस माह की आखिरी तारीख तक प्रारूप सूची के प्रकाशन का लक्ष्य रखा गया है। वहीं देश के अन्य राज्यों उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्टÑ, राजस्थान और उड़ीसा में प्रारूप सूची का प्रकाशन तक नहीं हो सका है। विभिन्न राज्यों मेें सामाजिक, आर्थिक और जाति आधारित जनगणना का हाल यह है कि असम के 17 जिलों में, कर्नाटक के 6 जिलों में, गुजरात के 2 जिलों में, केरल के 1 और पश्चिम बंगाल के 8 जिलों में ही प्रारूप सूची का प्रकाशन हो सका है।

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