जोहानिसबर्ग। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला गया पहला टेस्ट किसी वनडे मैच जैसा नाटकीय उतार-चढ़ाव के बाद अंतत: ड्रॉ पर छूटा। 458 रन के रिकॉर्ड लक्ष्य का पीछा करते हुए अफ्रीकी टीम ने कमाल का जीवट दिखाते हुए आखिरी दिन का खेल समाप्त होने तक सात विकेट पर 450 रन बनाए। मेजबान टीम लक्ष्य से आठ रन पीछे रह गई, जबकि दूसरी पारी समाप्त करने के बाद जीत सुनिश्चित समझ रही भारतीय टीम अपने लक्ष्य से तीन विकेट पीछे रह गई।

भारतीय गेंदबाज पहले दो सत्र में काफी कोशिशों के बावजूद केवल दो विकेट ही निकाल पाए, जिससे दक्षिण अफ्रीका की स्थिति बेहद ही मजबूत हो गई और वह ऐतिहासिक जीत की तरफ अग्रसर दिखी। लेकिन आखिरी सत्र के आखिरी घंटे में चार विकेट गिर जाने की वजह से मैच ड्रॉ की तरफ मुड़ गया। कल के नाबाद बल्लेबाज फाफ डु प्लेसिस (134) और एबी डिविलियर्स (103) भारत की राह का सबसे बड़ा रोड़ा बनकर उभरे। दोनों ने 200 से अधिक रनों की साझेदारी करके पहले तो भारत को जीत से दूर किया और फिर अपनी टीम को जीत की राह पर डाला।

यदि मैच समाप्ति से तीन ओवर पहले रहाणे के डायरेक्ट हिट पर प्लेसिस रन आउट नहीं होते तो भारत की हार निश्चित ही थी। प्लेसिस के जाने के बाद क्रीज पर खड़े बल्लेबाज वर्नेन फिलैंडर (नाबाद 25) और डेल स्टेन (नाबाद 06) ने कोई जोखिम नहीं लिया। प्लेसिस क्रीज पर 395 मिनट तक खड़े रहे और 309 गेंदों का सामना कर 15 चौके लगाए। उनसे पहले डिविलियर्स आउट हुए। उन्होंने 168 गेंद पर 12 चौके लगाए।

विशाल लक्ष्य को देखते हुए भारत की जीत तय मानी जा रही थी, लेकिन टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक पर काबिज अफ्रीकी टीम जीत तो हासिल नहीं कर सकी, लेकिन अपनी काबिलियत साबित करते हुए चौथी पारी में किसी भी टीम द्वारा बनाए गए सर्वाधिक स्कोर का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के नाम था। उन्होंने 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरी पारी में 428 रन के लक्ष्य को हासिल करते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। भारत की ओर से मुहम्मद शमी दूसरी पारी में सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने 107 रन देकर तीन विकेट चटकाए। जहीर खान और इशांत शर्मा को एक-एक विकेट मिला। सीरीज का दूसरा और अंतिम मैच 26 दिसंबर से डरबन में खेला जाएगा।

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