नयी दिल्ली : पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली के खिलाफ अनुचित यौन व्यवहार करने का आरोप लगाने वाली महिला प्रशिक्षु वकील ने उनके निर्दोष होने के दावे को खारिज करते हुए पुलिस शिकायत दर्ज करने के संकेत दिये है। न्यायमूर्ति गांगुली ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पी. सदाशिवम को कल लिखे पत्र मे कहा कि वह निर्दोष है और उनका पक्ष निष्पक्ष तरीके से नहीं सुना जा रहा है। लेकिन इस पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया मे प्रशिक्षु वकील ने न्यायमूर्ति गांगुली के निर्दोष होने के दावे को दरकिनार कर दिया है। आरोप लगाने वाली प्रशिक्षु वकील ने जर्नल आॅफ इंडियन लॉ एंड सोसाइटी नामक ब्लॉग में अपने ताजा पोस्ट में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के दावों को खारिज करते हुए लिखा है कि ऐसा इस मामले को रास्ते से भटकाने के लिए किया जा रहा है। प्रशिक्षु वकील ने लिखा है कि तीन सदस्यीय समिति द्वारा रिपोर्ट सौपे जाने के बाद कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियो और कानूनविदो ने उसकी छवि खराब करने का प्रयास किया था। इसीलिए उसने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह को अपनी आपबीती का कुछ हिस्सा सार्वजनिक करने का अधिकार दिया।
उसने लिखा है ..निश्चित समय पर निश्चित कारर्वाई करना मेरा विशेषाधिकार है। मेरा आग्रह है कि मेरी स्वायत्तता का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए।

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