पटना:
भाजपा में हाल में शामिल हुए पूर्व आईएएस अधिकारी आरके सिंह ने केंद्र की संप्रग सरकार को सुशासन के मामले में दिशाहीन तथा उसके मंत्रियों के भ्रष्टाचार में सभी हदें पार जाने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को कहा कि नरेंद्र मोदी देश को नयी दिशा दे सकते हैं। भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए सिंह ने केंद्र की संप्रग सरकार को सुशासन के मामले में दिशाहीन तथा उसके मंत्रियों के भ्रष्टाचार में सभी हदें पार जाने का आरोप लगाते हुए आशा व्यक्त किया कि नरेंद्र मोदी देश को नयी दिशा दे सकते हैं। सिंह केंद्रीय गृह सचिव के पद से पिछले जुलाई महीने में सेवानिवृत्त हुए हैं। श्री सिंह ने कहा कि उक्त पद पर आसीन रहने के दौरान गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से उनका गहरा मतभेद रहा। उन्होंने खुलासा किया कि जब वे गृह सचिव थे तो उस समय तीन निजी लोग उन्हें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का किसी खास स्थान पर स्थानांतरण के लिए मंत्री के नाम पर पर्चा भेजा करते थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी की उपस्थिति में सिंह ने आरोप लगाया कि आम आदमी के लिए लुभावने नारे की घोषणा करने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी पार्टी (कांग्रेस) के हाईकमान को यह भी पता नहीं है कि जमीनी स्तर पर जिला, अनुमंडल और प्रखंडों में योजनाएं कैसे संचालित होती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रधानमंत्री स्वयं कोयला मंत्रालय के प्रभार में थे, तो खदानों के आवंटन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त था जिसपर उनका नियंत्रण नहीं था। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर कोई टिप्पणी नहीं की, पर उन्होंने नरेंद्र मोदी की खूब प्रशंसा की। आरके सिंह ने नरेंद्र मोदी को पूरी तरह से साफ सुथरा बताते हुए कहा कि एक अच्छे नेता के लिए आवश्यक गुण के अनुसार वे बेहतर परिणाम देने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने केंद्र की संप्रग सरकार में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के व्याप्त होने का दावा करते हुए कहा कि संप्रग एक और संप्रग दो सरकार की कार्यशैली से अवगत राहुल को भ्रष्टाचार के बारे में अब पता चला है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पथ निर्माण आधारभूत संरचना सलाहकार पद का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद उन्होंने भाजपा में शामिल होने को क्यों चुना, इसके बारे में सिंह ने कहा कि वह सोचते हैं भाजपा इकलौती पार्टी है, जो कि देश के अंदरूनी और बाहरी सुरक्षा से समझौता नहीं करती और यह उनके मिजाज के अनुसार है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस प्रस्ताव को नहीं स्वीकार करने तथा भाजपा में शामिल होने की तीन प्रमुख कारणों में उनके मित्रों और रिश्तेदारों की सलाह, कांग्रेस के साथ नीतीश की नजदीकी तथा राज्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का व्याप्त होना शामिल रहा।

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