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कांगे्रसपरस्ती नीति छोड़े तो राजद से तालमेल : दीपंकर

पटना : माले ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सिर्फ सियासी तालमेल के आधार पर न तो सांप्रदायिक शक्तियों को शिकस्त दी जा सकती है और नहीं गुजरात के मुख्यमंत्री व पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को केंद्र की सत्ता तक पहुंचने से रोका जा सकता है। माले का मानना है कि सिर्फमजबूत लोकतांत्रिक प्रतिरोध के जरिये ही नरेंद्र मोदी को केंद्रीय सत्ता में काबिज होने से रोका जा सकता है। माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने स्पष्ट कहा कि माले व राजद का तालमेल तभी संभव है जबतक कि वह कांगे्रसपरस्ती नीति छोड़ जनतांत्रिक मूल्य आधारित नीतियों को तवज्जों नहीं देगा।उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि बिहार की राजनीति में राजद की अहम भूमिका है लेकिन रोजी-रोजगार, किसानों की बदहाली के साथ-साथ देश के तमाम मौजूदा हालात के लिए कांगे्रस जिम्मेदार है। ऐसी स्थिति में कांगे्रस को फायदा पहुंचाने वाले राजनीतिक गठबंधनों के जरिये सांप्रदायिक शक्तियों को नहीं रोका जा सकता। माले के राष्टÑीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य मंगलवार को आईएमए के सभागार में संवाददाताआें को संबोधित कर रहे थे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जदयू से माले का कोई तालमेल नहीं होगा। जदयू-भाजपा जबतक साथ रही तबतक भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट लागू करने में अड़ंगा डालने का ठीकरा भाजपा पर फोड़ा जाता रहा। अब प्रदेश में जदयू की सरकार है लेकिन अब अगर भूमि सुधार कानून लागू नहीं हो रहा है तो इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिम्मेदार है। अमीर दास आयोग को पुन: बहाल करने की दिशा में भी जदयू सरकार अबतक कुछ नहीं कर पा रही है। ऐसे में जदयू से भी माले का तालमेल संभव नहीं है। दीपंकर ने जदयू पर दमनकारी और निकम्मी सरकार होने का आरोप लगाया।

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