कुमार प्रभात, पटना : इस विषय पर बहुत गंभीरता से इसलिए सोचना ज़रूरी है क्योंकि, ये बहुत खतरनाक तरीक़े से हमारी हज़ारों ज़िन्दगियों को लील रहा है।हम बात कर रहे हैं सड़क पर लगातार हो रही मौतों और उसके कारणों के बारे में। अपने देश मे लगातार राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़कें बन रही है और ना सिर्फ़ ये बल्कि गांव और अन्य सभी छोटी बड़ी सड़कें लगातार बन रही है। यहां तक तो सारी चीज़ें सही है। सरकार का लक्ष्य है और वो उसपर काम कर रही है।

बड़ी समस्या तब आती है जब इन सड़कों पर बड़ी और अनियंत्रित गाड़ियां चलती हैं। और उसकी चपेट में छोटी गाड़िया, मोटरसाइकिल सवार ऑटो सवार पैदल आ जाते है। कई दफा देखने को मिलता है कि बैरियर और सिग्नल को तोड़कर गाड़ियां लोगों को रौंदकर जिंदगियां लील गई हैं। इसके कारणों की पड़ताल में अगर जाएं तो पता चलता है कि इसमें सरकार की नीतियों में सुधार से ज़्यादा खुद में बदलाव की ज़रूरत दिखती है क्योंकि जब तक हम ख़ुद की ज़िंदगी और किसी अन्य की ज़िंदगी की अहमियत नहीं समझेंगे तब तक शायद कुछ न हो। हमें समझना होगा कि सड़क पर बड़े से छोटे वाहन चलाते समय नियमों का पूर्ण रूप से पालन हो। हम सचेत सतर्क रहें। सावधान रहें। और इस बात को ज़रूर सोचें कि अगर हमें कुछ हो गया तो हमारी फैमिली या अगर हमसे किसी दुसरे व्यक्ति को कुछ हो गया तो उसका परिवार उजर जाएगा। और सड़क किनारे हो रही ज़्यादातर मौतों में वही गरीब और असहाय लोग होतें हैं जिनका भगवान के अलावा देखने वाला कोई नही है। हमें खुद की अहमियत को समझना होगा। और दूसरे की ज़िंदगी के बारे में सोचना होगा तो अब आइये हम संकल्प लें कि हम सड़क पर पूर्ण रूप से सतर्क होकर चलेंगे। साथ ही सरकार को भी चाहिए कि वो लगातार जागरूकता कार्यक्रम और सड़क सुरक्षा से संबंधित नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करे ताकि लगातार हो रही मौतों पर लगाम लगे। हमें यह समझना होगा की अगर हम किसी की ज़िंदगी दे नही सकते तो कम से कम उसे लेने का भी हक़ नहीं है

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