केजरीवाल के दिन इन दिनों वाकई  अच्छे नहीं चल रहे हैं | वैसे तो आज कल आम आदमी पार्टी में आंतरिक कलह चरम पर है लेकिन कुमार विश्वास के मामले में पार्टी के लगभग सभी शीर्ष नेताओं ने अपने तेवर नरम करते हुए उनकी शर्तें मान ली | यूं तो पिछले कुछ दिनों से कुमार काफी मुखर ढंग से अपनी बात मीडिया से कह रहे थे जो कई बार पार्टी लाइन से हट कर भी होती थी |मसलन पार्टी द्वारा अपनी पराजय का दोष ई वी एम् पर  मढ़ देने की उन्होंने आलोचना की थी और कहा था कि , हमें अपने गिरेबान में झांकना होगा ,अपनी कमियों को टटोलना होगा |

ये भी पढ़े :- घर के आटे में ये चीजे डालते ही बरसने लगेंगे पैसे

पहले तो पार्टी के कुछ लोग इस पर टिप्पणी करते नज़र आये लेकिन जब विधायक  अमान्तुल्लाह ने उन पर भाजपा एजेंट होने का आरोप लगा दिया तो विश्वास बिफर गए और वह पी ए सी की बैठक में भी नहीं आये|ताबड़तोड़ इस्तीफों से परेशान केजरीवाल किसी भी कीमत पर विश्वास को खोना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने पहले पार्टी के वरीय नेताओं को उन्हें मानाने भेजा |जब बात नहीं बनी तो खुद केजरीवाल उनके घर गए और उनकी हर शर्त मानते हुए उन्हें राजस्थान का प्रभारी भी बना दिया |अगले साल वहां विधानसभा चुनाव होने हैं |अब तक राजस्थान के प्रभारी मनीष सिसोदिया थे जो उप – मुख्य मंत्री हैं |केजरीवाल ने विश्वास की शर्त मानते हुए अमानातुल्ल्ह को पार्टी से निलंबित कर दिया |

ये भी पढ़े : नौकरी दिलाने के नाम पर युवती से यौन शोषण

हो सकता है आने वाले समय में यह कदम केजरीवाल और उनकी पार्टी को भरी पड़े क्यूंकि अल्पसंख्यक मतों पर इसका असर पड सकता है |बहरहाल ,काफी मान -मनुहार के बाद कुमार विश्वास तो मान गए है पर यह कह देना कि आम आदमी पार्टी में सबकुछ ठीक हो गया है ,गलत होगा |पार्टी में अंदरूनी कलह अभी और बढ़ेगी |इस घटना ने निश्चित ही पी ए सी के सदस्यों की चिंता बढ़ा दी होगी जो कि स्वाभाविक भी है |वैसे भी अमानातुल्लाह के तेवर नरम नहीं पड़े हैं और वह अभी भी अपनी बातों पर कायम हैं |

loading...

LEAVE A REPLY