एक तरफ महंगाई की मार तो दूसरी ओर मौसम की बेरूखी ने किसानों की हालत को बद से बदतर कर दिया है। रिकार्ड तोड़ ठंडक ने जहां सरसों,आलू,अरहर की फसलों पर अपना कुप्रभाव डाल कर फसलों को नष्ट कर दिया वहीं तुलसी व नीम के पत्ते भी सूखकर झड़ गए। इन फसलों के नुकसान होने के बाद गेंहू व मक्के की फसल पर हीं किसान टकटकी लगाए बैठे थे। परन्तु मौसम की बेरूखी का मक्के की फसल पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। खेतों में लहलहाती मजबूत हरे भरे मक्के के पौधों में जहां दोहरे भुट्टे तो पकड़े हैं परन्तु उन भुट्टों में यदा कदा ही दाने पकड़े हैं जिससे किसानों में मायूसी छायी है। प्रखंड क्षेत्र के अगहरा ,मिर्जापुर,गौरा हसनपुरा ,तेजपुरवां, शिल्हौरी सहित अन्य पंचायतों में मक्का रोपनी तो हुई लेकिन हैरानी की बात यह है किसानों के बारंबार पटवनी करने के बावजुद भी मक्का के बाल में दाना नहीं पकड़ा है। जिससे किसान काफी परेशान है। अगहरा के चंदा निवासी दिपनारायण राय ने बताया कि ऐसी बात नही कि फसल कमजोर है। लहलहाती मक्के की फसल व दोहरी तेहरी भुट्टे को देख मन खुश थे।

उन्होंने मक्के की खेती में मेहनत छोड़ हजारों रूपये खर्च किए थे ताकि पैदावार अच्छी होगी परन्तु मौसम की बेरूखी ने उनके सपनों को चूर कर दिया। इसी तरह नजाने कितने ही किसानों ने हजारों रुपये लगाकर मक्का की खेती तो कर लिया लेकिन पैदावार साफ सिर्फ न के बराबर है। फसल क्षति के सर्वेक्षण को लेकर कृषि समन्वयक मनोज तिवारी के नेतृत्व में किसान सलाहकार विजय कुमार,राजु कुमार और विक्की आनन्द ने संयुक्त रुप से बताया कि हमें सर्वेक्षण हेतु मिले आवंटित पंचायत में ज्यादातर किसानों के फसल को पूरी तरह क्षति पहुंचा है कुछ किसान ऐसे है जो देरी होने के वजह से फसल को चारा के रुप में इस्तेमाल कर चुके हैं कुछ में फसल साठ व चालीस प्रतिशत के अनुपात में क्षति पहुंची है। हालांकि कृषि विभाग के द्वारा मक्के की फसल के क्षति का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी शेखर कुमार मधुकर ने बताया कि सभी किसान सलाहकारों व समन्वयकों का अलग – अलग टीम बनाकर फसल क्षति के सर्वेक्षण में लगा दिया गया और मक्के की क्षति का रिपोर्ट दो दिनों के अन्दर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट आने पर फसल आगे की कार्यवाई हेतू जिला में भेज दिया जाएगा ।

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