“रक्षा करो मेरी, ओ वीरों
सिर्फ राम नाम की करते हो तुम तो।
ये कब मैंने कह दिया
या कर दिया..
के घृणा करने लगे
उस धर्म से, उस जात से।
रे भाई मैंने उठाया था हथियार
सत्य की जीत हेतु।
सम्मान की रक्षा हेतु।
अहंकार के समापन हेतु।

सामने वाला दूसरे धर्म का कहां था?
और जरा देखना ध्यान से
हमारा शत्रु, क्या वास्तव में
विधर्मी ही हैं। विजातीय ही हैं।

धरम का पता चल जाएगा।
जात का पता चल जाएगा।
औरतों की तरफ उठते निगाहों को देख
कमजोरों के तकलीफों के कारणों को देख
और तो और पता है तुम्हें वे कौन हैं?
चौराहें पर फब्तियां कसते उन लौंडों को देख।

राम भक्तों के नसों में रवानगी देखना चाहता हूं
पुरुषों की भुजाओं से पुरूषार्थ देखना चाहता हूं
क्या सच में खून नहीं खौलता इन पापों को देख
वीरत्व के प्रकोप से पापियों में भय देखना चाहता हूं।

रक्षा करो राम के रामत्व की
जयकारा तो चमचे भी करते है।
बनो सच्चे वीर हिंदू, रक्षा के लिए
घृणा तो पापी भी करते है।।”

रामनवमी की अशेष शुभकामनाएं।
और कहे रिदय से..
जय श्री राम।
जय श्री राम।

लेखक (संदीप कुमार चंद्रवंशी)

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