पिछले दिनों बिहार में शराबबंदी में जब्त शराब चूहे के पी जाने की खबर से सरकार की बहुत फजीहत हुई।सो पहली बार सरकार ने एक दो नही 17000 शराब की बोतलों पर चलवा दी रोड रोलर। शराब की नदी बह रही है मगर ये पीने के लिए नही ये बहने के लिए है।जी हाँ बिहार में 5 अप्रैल 2016 से हुई शराबबंदी के बाद ये पहला मौका जब सरकार ने शराब को इस तादाद में नष्ट करने का लिया निर्णय।
17586 bottles,9645.60 litres..और कीमत करीब 1 करोड़ मगर जब शराबबंदी में इसकी black marketing कर 3 से 4 करोड़ तस्कर कमाते   ।पिछले दिनों जब खबर आई की थानो के मालखाने से गायब हो रही है शराब तो बहुत हाय तौबा मची और सरकार ने इस डेमेज कण्ट्रोल के लिए पहला कदम राजधानी में हीं उठाया।पटना के कलेक्टर को मिली जिम्मेदारी,पटना के पास खगौल में beverage Corporation के परिसर में शराब की बोतलों पर चले रोड रोलर।

यानी सरकार ने कमर कसी है की शराब अगर सीमा पार करेगा तो वो नालियों में बहेगा।ये शराब भी एक कन्टेनर में हरियाणा से अवैध रूप से ला बिहार के कोने कोने में बेचे जाने थे,मगर अब ये सब नष्ट किये गए।सरकार को अपनी साख बनाये रखने को ऐसी मुहीम चलाये रखनी होगी।

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