पटना : पारस हास्पिटल में न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मुकुंद ने पिछले दिनों पारस हास्पिटल में आए एक 22 वर्षीय मरीज के ब्रेन ट्यूमर जिसे सीपी एंगल कहा जाता है.  डॉ. मुकुंद ने 23 घंटे की मेराथन सर्जरी कर इसे हटाया. सर्जरी 30 मार्च को सुबह 9.50 बजे शुरू हुई और 31 मार्च को सुबह 8.50 बजे खत्म हुई.

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यह अपने आप में एक रिकार्ड है क्योंकि अभी तक बिहार में लगातार 23 घंटे की कोई सर्जरी नहीं हुई है. सर्जरी के बाद युवक स्वस्थ है. सात दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी भी मिल जाएगी. न्यूरो सर्जन विगत तीन वर्षों से पारस हास्पिटल में कार्यरत हैैं और अब तक 1200 से अधिक सर्जरी कर चुके हैैं. इसके पूर्व वह कोलकाता के एमआरआई और केरल में श्री चित्रा में काम कर चुके हैैं.

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डॉ. मुकुंद ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर एक कॉमन बीमारी है. अभी तक इसकी वजहों का पता नहीं चल पाया है. हमें यह भी जानना चाहिए कि उन्नीसवीं सदी के आरंभ में अमेरिका के वाल्टर डैरी ने पहली बार ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन किया था. तेईस घंटे वाली काफी संवेदनशील सर्जरी के संबंध में डॉ. मुकुंद ने बताया कि मरीज पूर्णिया के एक अस्पताल से स्थानांतरित होकर आया था. यह डिटेक्ट था कि उसे सीपी एंगल ट्यूमर है. कान के पास से चार नर्व निकलते हैैं. इनमें एक सुनने के लिए एक इसे कंट्रोल करने के लिए और एक शरीर को नियंत्रित करने के लिए होता है. दो नर्व जिसे सुपीरियर और इनफीरियर नर्व कहते हैैं. इसी से ट्यूमर निकला है, ब्रेन ट्यूमर का कोई तय कारण नहीं होता. जीन में समस्या की वजह से यह हो सकता है. इसके लक्षण को यूं समझ लीजिए कि शुरू में चक्कर आता है, कान में सीटी बजती है, आपके सुनने की क्षमता खत्म हो सकती है और शरीर के असंतुलन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है. ट्यूमर अगर बड़ा हो जाता है तो ब्रेन में पानी जमा हो जाएगा और आपका विजन भी खत्म हो जाएगा.

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डॉ. मुकुंद कहते हैैं कि इस मामले में एलर्ट रहना जरूरी है. अगर पच्चीस की उम्र के बाद किसी को पहली बार मिर्गी आ रही तो तुरंत स्कैन कराना चाहिए कि कहीं ट्यूमर की समस्या तो नहीं. इसी तरह अगर शरीर को संतुलित करने में परेशानी हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें. पारस एचएमआरआई के निदेशक स्वास्थ्य डॉ. तलत हलीम ने इस संबंध में कहा कि पारस में हाईएस्ट एंड की सर्जरी उपलब्ध है. यह भी तथ्य है कि जिस अस्पताल के खर्चे के साथ पटना के पारस में यह ऑपरेशन हुआ. वहीं ऑपरेशन अगर दिल्ली के किसी अस्पताल में होता तो खर्च दोगुना आता. पारस में तो अब स्पाइन की सर्जरी दूरबीन के माध्यम से शुरू हो गयी है. सीटी कोलोनाग्रफ और वर्चुअल कोलोनोग्राफ की सुविधा भी यहां मिल रही है. पटना में इस तरह के ऑपरेशन पर आए खर्च के संबंध में डॉ. मुकंद का कहना है कि 3.5 लाख खर्च संभव है. साथ ही उन्होंने बताया कि मरीज को चार यूनिट ब्लड भी हास्पिटल के ब्लड बैैंक से दिया गया. वहीं ख्याति प्राप्त सर्जन डॉ. एए हई ने कहा कि डॉ. मकुंद ने जिस तरह के ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी पारस हास्पिटल में की वह बिहार में कभी नहीं की गयी. शारीरिक रूप से तेईस घंटे खड़े होकर माइक्रोस्कोप के माध्यम से सर्जरी का काम काफी कठिन था. सर्जरी टीम में डॉ. शाश्वत, डॉ. श्रीनारायण, संजय, सुनील, डॉ. कविता, नीतू, शीजा, रॉबिन विक्टर, अशोक, एमआई खान, सुशांत और विमलेश भी शामिल थे.

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