बिहार में बिछ चुकी है नई राजनीतिक बिसात,अब लड़ाई अहम और स्वाभिमान की होगी शुरू।राष्ट्रीय जनता दल को नया झटका,एक तो राष्ट्रीय जनता दल सरकार  से गयी और अब तो उच्च सदन में नेता विरोधी दल की भी कुर्सी राबड़ी देवी को नही मिलेगीं

बिहार विधान परिषद जो विधानमंडल का उच्च सदन है,यहां सदस्यों की संख्या 75 है।इस परिषद की खास बात ये की बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार,उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी सभी इसके सदस्य।बिहार में सत्ता परिवर्तन और राष्ट्रीय जनता दल ट्रेजरी से अपोजिशन बेंच पर,और बीजेपी अपोजिशन से ट्रेजरी बेंच पर।सुशील कुमार मोदी परिषद में नेता विरोधी दल थे ,अब चूंकि राजद विपक्ष में सो अब नेता विरोधी दल राजद से होगा।राबड़ी देवी ने इसके लिए दावेदारी की और जदयू ने बनाया माखौल।
75 सदस्यों वाली विधान परिषद में अगर बात ताकत की करें तो

राजद..07,जदयू…30,बीजेपी – 23,रालोसपा 01,लोजपा 01

सीपीआई – 02,निर्दलीय – 03,कांग्रेस – 06 और 2 स्थान रिक्त हैं।ऐसे में नेता विरोधी दल के लिए कम से कम 9 सदस्य चाहिए,जो राजद के पास नही है।विधान परिषद के सभापति ने साफ कहा कि नियम जो होगा वही होगा,उन्हीने संसद का हवाला दिया।

मगर खास बात ये की 2010 में विडगं सभे में राजद के 22 विधायक थे यानी नेता विरोधी दल के लिए जो न्यूनतम संख्या चाहिए उससे काफी कम फिर भी अब्दुल बारी सिद्दीकी को नेता विरोधी दल का दर्जा मिला था मगर इस बार मिज़ाज़ और अंदाज़ बदल चुका है।राजद भी समझ गयी की सरकार ने दो दो हाथ का मन बना लिया है।इस मुद्दे पर अपनी बात लेकर विधान परिषद सभापति के पास पहुंची राबड़ी देवी को खाली हाथ निराश लौटना पड़ा।राबड़ी ने कहा वक़्त पर जवाब देंगे।

अब ऐसे में तो राजद के लिए राह आसान नही,21 अगस्त से 25 अगस्त तक चलना है विधानमंडल का मानसून सत्र और राजद की भूमिका होगी दिलचस्प।

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