देश भर में किसान को लेकर चिंता ….बीजेपी शासित मध्य प्रदेश चर्चा में और ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री का जागा किसान प्रेम,उन्होंने precaution is better than cure की नीति अपनाई।पटना में किसान समागम और मुख्यमंत्री हुए इतने भावुक की न सिर्फ पूरा दिन किसानों के साथ गुज़ारा बल्कि जमीन पर बैठ किसानों के साथ किया भोजन।
बिहार में भी किसानों के आंदोलन की शुरुआत के इशारे मिलने लगे हैं।बिहार के मुख्यमंत्री ने किसान समागम बुलाया तो पटना में एक किसान संगठन ने प्याज जला और दूध बहा अपना रोष व्यक्त किया।उनके अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य और किसानों की कई समस्या दूर करने की मांग।
 इन्ही सब बातों का डर बिहार के मुख्यमंत्री को है।बिहार की 76प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है।मध्य प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से हंगामा बरपा है सो ऐसे में नीतीश कुमार ने पहले हीं किसानों का मिज़ाज़ भाँपने शुरू किये हैं। सूबे भर से 800 किसानों को आमन्त्रित कर किसान समागम का आयोजन किया।मुख्यमंत्री की कोशिश खुद को किसानों के करीब और उनके बीच का खुद को दिखाने की रही ।तभी समस्या सुनते जब भोजन का वक़्त हुआ तो सभी के उम्मीद के विपरीत मुख्यमंत्री जमीन में किसानों के बीच बैठ भोजन करते दिखे।अपने भाषण में बार बार खुद को किसान बताने की कोशिश भी रही।
दरअसल बिहार में किसानों से जुडी कई समस्याएं हैं जिनको अगर दूसरे राज्यों के आंदोलन की हवा मिली तो मुश्किलें बिहार सरकार के लिए बढ़ेंगी,सो नीतीश कुमार ने खुद को किसान तो बताया ही केंद्र की किसानों के लिए चल रही योजनओं की धज्जियां भी उड़ाई।कोशिश ये रही की खुद को किसानों के करीब और केंद्र को उनसे दूर बताया जाए।किसानों के आंदोलन को रोकने के लिए जो प्रयास दूसरे राज्य कर रहे हैं उसे भी नकाफी बता खुद का इलाज़ सुझाया।केंद्र सरकार का किसानों के लिए चलाया जा रहा फसल बीमा योजना,बीमा कम्पनियों का बीमा है।
देश में कृषि क्षेत्र में संकट का कारण कुछ और है,ऋण एक समस्या है,समस्या हमारे देश में बढ़ रही उत्पादक की लागत है।किसान को नही मिल रहा सही दाम। सरकार का किसानों के लिए चलाया जा रहा फसल बीमा योजना,बीमा कम्पनियों का बीमा है।
देश में कृषि क्षेत्र में संकट का कारण कुछ और है,ऋण एक समस्या है,समस्या हमारे देश में बढ़ रही उत्पादक की लागत है।
तो नीतीश कुमार ने किसानों का मन तो भांप लिया अब उस अनुसार तैयारी की कोशिशें भी शुरू यहीं से की जब ये आश्वासन दिया की हम खेती के पहले भी अनुदान की व्यवस्था करेंगे।देखें राजधानी से मुख्यमंत्री की बात सुन कर गए किसानों पर प्रभाव क्या पड़ता है।
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