पटना : अंग्रेजी पत्रकारिता के क्षेत्र में बिहार-झारखंड ही नहीं बल्कि देश-विदेश में अपनी एक खास पहचान बनाने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर कुमार शुक्रवार को नेटवर्क 18 बिहार-झारखंड के संपादक बनाये गए हैं। नेटवर्क 18 के ग्रुप एडिटर राजेश रैना और एडिटर इन चीफ राहुल जोशी ने आज आधिकारिक रूप से प्रभाकर कुमार को संपादक बनाये जाने की घोषणा की है।
मिली जानकारी के अनुसार प्रभाकर कुमार अब बतौर सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर नेटवर्क 18 में अपना योगदान देंगे। वे इससे पहले 2005 से ही सीएनएन-आईबीएन (नेटवर्क 18) के ब्यूरो चीफ के रूप में अपना योगदान देते आ रहे हैं।

प्रभकार कुमार न सिर्फ अंग्रेजी न्यूज देखने वाले और एलीट क्लास में, बल्कि दूर दराज के पिछड़े इलाकों तक में भी काफी जाने माने नाम हैं। पिछड़े इलाकों में रहने वाले लोगों के सरोकारों से उनका पुराना नाता है।

प्रभाकर कुमार का जन्म बिहार के एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। उनके पिता स्व. बीरेंद्र सिंह इंजीनियर थे। प्रभाकर की प्रारंभिक शिक्षा वाराणसी के प्रतिष्ठित बेसंट कॉन्वेंट में हुई जो भारत के चंद श्रेष्ठ स्कूलों में शुमार है। पटना विश्वविद्यालय के बीएन कॉलेज से 1997 में ग्रैजुएशन करने के बाद उन्होंने कंप्युटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा भी हासिल किया। जब 1999 में हिन्दुस्तान टाइम्स में भर्ती के लिये लिखित परीक्षा हुई तो प्रभाकर कुमार ने अपनी योग्यता से उसमें क्वालिफाई कर लिया। लगभग चार साल हिन्दुस्तान टाइम्स में रहने के बाद वर्ष 2004 में एनडीटीवी में बिहार संवाददाता चुने गये।
प्रभाकर कुमार की छवि एक तेज-तर्रार और सुशिक्षित पत्रकार की है जो खबरों की तह तक जाते हैं और किसी भी दबाव में नहीं आते। नक्सलवाद, अपराध, माफिया राज, बेरोजगारी, गरीबी, बाढ़, अकाल व भुखमरी जैसी समस्याओं से त्रस्त बिहार-झारखंड में निडरता से रिपोर्टिंग कर वास्तविक तस्वीर पेश करना कोई आसान काम नहीं है। उनकी कई रिपोर्टों से चेत कर प्रशासन और अदालतों ने कार्रवाई की है। पॉजिटिव पत्रकारिता में यकीन रखने वाले प्रभाकर कुमार ने सरकारी नीतियों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को काफी सरलता से पेश किया है जिससे लोगों को उसका लाभ उठाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। नेपाल के भूकंप और कोशी के बाढ़ के दौरान ये ग्राउंड जीरो पर पहुंच कर रिपोर्ट भेजने वाले सबसे पहले पत्रकार थे। उन्होंने 100 से भी अधिक एक्सक्लूसिव खबरें प्रसारित की हैं और 500 से भी अधिक बाई लाइन रिपोर्ट्स उनके नाम हैं।
प्रभाकर जी ने कहा कि उन्हें मिली इस नई जिम्मेदारी को वे बखूबी पूरा करेंगे। अब चुनौतियां पहले से ज़्यादा होंगी। बिहार झारखंड में नेटवर्क 18 की एक खास पहचान है जिसे आगे भी बरकरार रखा जाएगा

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