श्रीकांत, पटना- पटना बिहार की राजधानी होने के साथ ही अपने पुरातात्विक महत्व और उस क्षेत्र के लिए जाना जाता है जिसने कृषि में स्वर्णिम युग देखा है । पहले इसे पाटलिपुत्र ,कुसुमपुर अजीमाबाद भी कहा जाता था। यह प्राचीन में भी मगध क्षेत्र की राजधानी हुआ करती थी । यह क्षेत्र शिक्षा में भी अग्रणी रहा है और अभी भी है । ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में पटना भी कदम ताल करता दिख रहा है साफ तौर पर हरेक परिपेक्ष्य में दिल्ली की नकल उतारने की कोशिश कर रहा है लोगो मे आगे बढ़ने की होड़ ने उसे मानवता से काफी विमुख किया है। भौतिकवादी लालसा ने इस शहर को एक अजीब उधेड़बुन में फंसा रखा है।

नीतीश कुमार की सरकार बनने के बाद चहुंमुखी विकाश ने इसे भारत मे कभी इन्वेस्ट करने के लिए सबसे बेहतरीन शहरों में शामिल किया था यह सर्वे इंडिया टुडे ने प्रकाशित की थी।
बिहार की राजधानी होने के कारण जनसंख्या, रोजगार और शैक्षणिक क्षेत्र के रूप में दबाब किसी से छिपा नही है। लोग अपनी आकांक्षाओं की तृप्ति के लिए प्रत्येक दिन बिहार के कोने- कोने से लोग यहां आते हैं और यही के होकर रह जाते हैं। इन सभी की दैनिक वस्तुओं व रहने की समस्या की पूर्ति करने की होड़ में इस शहर ने अपने आप को कंक्रीटों में छिपा लिया है। इसका असर ऐसा कि गंगा तट को भी नही छोड़ा।

इसके कांक्रीटीकरण में एक बड़ा हाथ बिहार के संपन्न लोगों का राजधानी में घर होने का सपना भी कहा जा सकता है। इसमें कोई दो राय नही की किराया यहां का मुख्य व्यवसाय बन चुका है और हो भी क्यों नही आखिर मांग भी तो वृहत है।कुछ सालों पहले तक इसके अगले बगल के क्षेत्रों में हरियाली पर्याप्त थी मगर शहर के विस्तारीकरण ने उसे भी लील लिया। हद तो तब हो गयी जब बैली रोड पर जगदेव पथ से शेखपुरा मोड़ तक ऊपरी पुल बनाया जाना था इस दौरान सड़क पर कितने सारे पेड़ काटे होंगे एमजीआर लगाया एक भी नही गया।और अब यही हालत उसी सड़क में आगे की ओर अग्रसर है पता नही इसे काटने के लिए वन विभव से आज्ञा ली गयी या नहीं। 2014 में जब मैं पत्रकारिता में इंटर्नशिप कर रहा था तो मुझे अवैध अपार्टमेंट पर खबर लेने को कहि गयी मैं हैरत में पड़ गया पटना नगर निगम की साइट पर लगभग 1500 ऐसे अपार्टमेंट थे जो नियमों को ताक पर रखकर बनाये जा रहे थे । मेरा तो अंदाज इस बात को लेकर भी है जो व्यवसायिक भवन है उनमें आपदा से बचाव के भी कोई इंतजाम नही हैं। इसका ताजा उदाहरण है बोरिंग रोड चौहरे पर जीबी मॉल में अगलगी की घटना । कंक्रीट के साथ ही पटना में अब डोर तो डोर कूड़ा भी उतना बन्द हो चुका है कुल मिला कर कहा जाय तो यह शहर बेतरतीब तरीके से लोगो ने अपने आपको सिर्फ विकसित किया है पटना शहर की भूमि जितनी सलीके से सजी पाटली के वृक्षों से सजी और साफ थी अब ठीक उतनी ही उलट स्तिथि है। ट्रैफिक ,गंदगी अविकसित कॉलोनी,ड्रेनेज सिस्टम की खामी ऐसे ढेर सारी समस्याएं है जिनसे अभी पटना को निबटना है ।इन सारी समस्याओं का दोष नेताओं को तो जाता ही है साथ ही हमे भी कि हम शायद अपने गांव और कस्बे से दूर होते जा रहे हैं थोडे से लालच के वास्ते जबकि थोड़ी सी मेहनत से हम अपने गांव कस्बे में भी आराम से रह सकते है, नज़रिया बदलिए – परिणाम देखिए

loading...

LEAVE A REPLY