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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस ‘मासूमियत ‘ से यह सवाल पूछा है कि ,लालू के ठिकानो पर इनकम टैक्स के छापों का उद्देश्य क्या है उसे सुन कर एक बहुत पुराने गीत की लाइन याद आ गई , लाइन है ….”कहूं क्या वो बड़ी मासूमियत से पूछ बैठे हैं ,क्या सचमुच दिल के मारों को बड़ी तकलीफ होती है “|सारा बिहार जनता है कि लालूजी और उनके परिवार पर बेनामी सम्पत्ति बनाने ,फर्जी कम्पनियां खडी  करने और अकूत धन जुटाने के तमाम दस्तावेजी प्रमाण भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी लगातार सार्वजनिक कर उचित कार्यवाई की मांग कर रहे हैं |इन साक्ष्यों के आलोक में लालू और उनके दोनों बेटे ( राज्य के उप मुख्य मंत्री और स्वास्थ मंत्री )पर जब नीतीशजी से कार्यवाई करने को कहा गया तो नीतीशजी ने इसे केंद्र सरकार का मसला बता कर अपना पल्ला झाड लिया था |इसके पहले नीतीश और उनकी पार्टी (जद यू )के नेताओं ने इस मसले से अपने को अलग करते हुए मीडिया से कहा था कि इस मामले से उनका कोई लेना – देना नहीं |जिस पर आरोप है वो जाने या फिर उनकी पार्टी |नीतीशजी ने जैसे ही कहा कि इस मामले को केंद्र देखे ,ठीक उसके दूसरे दिन लालू के विभिन्न ठिकानो पर आयकर की टीम ने छापा मार दिया |अब इस छापे के लिए नीतीशजी ने केंद्र को कहा या ये सहज प्रक्रिया के तहत हो गया इस पर कोई अधिकारिक टिपण्णी फ़िलहाल मुमकिन नहीं |लेकिन कुछ तो ऐसा है जो बाद में सामने आएगा |

 

बहरहाल ,लौटते हैं नीतीशजी के सवाल पर कि ,इन छापों का उद्देश्य क्या है |ज़ाहिर है जब किसी के पास जरूरत से ज्यादा अघोषित संपत्ति होती है जिसका हिसाब – किताब उसने सम्बंधित विभाग को समय से नहीं दिया होता है ,और न ही उसकी जानकारी देने की उसकी नीयत होती है तो प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर सम्बंधित विभाग उचित कार्यवाई करता है |दोषी पाए जाने पर ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को अपराध के हिसाब से सजा भी मिलती है |इतनी सी बात तो आम नागरिक भी जानता है |वैसे भी हमारे बिहार में आये दिन राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियां भ्रष्ट अफसरों और व्यापारियों के खिलाफ कदम उठाती रहती हैं जिसमे कई बार नीतीश जी का सख्त आदेश शामिल होता है |अपने ‘शुशाशन बाबू’  के छवि को बरकारा रखने की कोशिश में वे अक्सर अपराधियों और घपला घोटाला करने वालों को सलाखों के पीछे भिजवाते रहते हैं |प्रदेश के कई आर्थिक अपराधी अफसरों को उन्ही के आदेश पर दण्डित किया जा चुका है |उन अफसरों और उनके परिजनों के बैंक खाते सील कर दिए गए हैं ,उनकी अवैध ढंग से बनी कोठियों और फार्म हाउस पर ताले जड़े  जा चुके हैं |अब ऐसे में हमारे मुख्यमंत्री का यह सवाल कि ,इन छापों का उद्देश्य क्या है कुछ चौंकाने वाला या फिर जरूरत से ज्यादा “मासूमियत ” भरा नहीं लगता |नीतीशजी आप प्रदेश के बेईमान अधिकारीयों और व्यापारियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाने का आदेश किस उद्देश्य से देते हैं |बस समझ लीजिये लालूजी और उनके कुनबे के खिलाफ ये छापे भी उसी उद्देश्य से डाले गए हैं |आपकी राजनीतिक बेचारगी समझ में आती है लेकिन आपकी यह  मासूमियत कुछ हज़म नहीं हुई |

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