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आखिर पिछले 20 महीनों के दौरान नीतीश के दिल पर क्या गुजरा
,कैसे खून का घुट पीकर रहे नीतीश कुमार
नीतीश ने माना देश मे नही है अभी नरेंद्र मोदी का कोई दूसरा विकल्प….
अब बयानबाजी नही सिर्फ कार्रवाई होगी चाहे बालू माफिया हो या और कोई माफिया….

जो कुछ भी हुआ है हमारे सामने कोई दूसरा विकल्प नही था।हमने महागठबंध्न को चलाने का कई प्रयास किया।आरजेडी की तरफ से कई बयान आये जो गठबंधन के लिए उचित नही था।मैंने साफ कह दिया था कि कानून अपना काम करेगा।मेरे ऊपर जो कहा गया(इशारा शहाबुद्दीन) उसपर लालू प्रसाद ने भी कोई जवाब नही दिया।यह मानकर चलता था कि गठबंधन में ऐसे विवाद होते है।लेकिन मेरी तरफ से आरजेडी प्रमुख के बारे में कोई बात नही की गई। मानकर चल रहे थे कि गठबंधन में यह सब होता है।इन सबके बावजूद हम काम पर लगे रहे ।जिलो में घुमा।निश्चय यात्रा के दौरान भी फीडबैक लेते रहे।
शराबबंदी को लेकर भी कई काम किया।मीडिया का भी सहयोग रहा।मीडिया न रहे तो बहुत सारी बाते जो नीचे होते रहती है उसकी जानकारी नही मील।हस्तछेप प्रशासनिक कार्यो में होता रहा।लेकिन फिर भी काम करते रहे।मन में यह बात आती थी कि महागठबंधन जब नाम दिया है तो परेशानी होगी।लेकिन जब मामला भरस्टाचार का आया तो संज्ञान लेना पड़ा।कठिन परिस्थिति आई।जब पहली बार देश भर में छापेमारी हुई तो ट्वीट किया गया तो कहा गया..बीजेपी को नए सहयोगी के लिए बधाई लेकिन सिर्फ 20 मिनट के बाद जो व्यवख्या भी की गई उसका मतलब सभी जानते है।
लेकिन इस बार छापेमारी हुई तो मैं राजगीर में था राजगीर से मेरा भावनात्मक लगाव है।लेकिन मैंने किसी से बात नही किया।
पटना लौटने के बाद मैंने लालू जी से भी बात की हर बात यही कहा गया सब कुछ स्पष्ट होना चाहिए।लालू जी को भी कहा।सीधे सवाल होता था मेरे बारे में जीरो टॉलरेंस को लेकर मैं क्या करूँगा।11 जुलाई को बैठक पहले से निर्धारित थी।पार्टी के अंदर 29 लोगो ने अपनी बात कही सभी ने यही कहा हमे अपने नीतियों से अलग नही होना चाहिए।हमने जनता के सामने स्पष्ट करने को कहा।लेकिन उसका भी मजाक उड़ाया जाने लगे।
जब हमसे तेजश्वी जी अकेले कैबिनेट मीटिंग के बाद मिले तो भी यही कहा आप जनता के सामने तथ्यों को पेश कीजिये।लेकिन तैयार नही थे।शायद उनके पास कहने को कुछ नही था।पहले से विधायक दल की बैठक निश्चित नही थी।लेकिन जब 26 को आरजेडी की बैठक हुई और उसमें यह कहा गया कि जवाब नही देंगे।तो फिर 26 की शाम में हमारी पार्टी के3 बैठक में चर्चा की गई। लोगो ने मुझे सौपा की जो आप तय करेंगे वही होगा।मेरे वीधायक दल ने 26 जुलाई को शाम 6 बजे यह निर्णय लिया कि मैं इस्तीफा दूंगा।इस्तीफा पत्र तैयार करने के बाद लालू प्रसाद और सीपी जोशी को फोन कर बता दिया कि अब हमसे यह गठबंधन संभव नही है।
उसके बाद जाकर इस्तीफा दिया।जब लौटे तो बीजेपी के शीर्ष स्तर से खबर आई कि हम साथ देने को तैयार है।हमने विधायको से बात की क्योंकि सभी विधायक यही थे।इसके बाद मैंने हामी भरी।जिसके बाद बीजेपी विधायक दल की भी बैठक हुई और फिर वो लोग मेरे पास आये विधायक दल का नेता चुना गया।हम राज्यपाल के पास गए और दावा पेश किया।अगले दिन सरकार बनाया।
हमारे पार्टी के नेता ऊब चुके थे।कल अल्पसंख्यक समाज के साथ बैठक की।हजार से ज्यादा लोग थे सभी ने कहा कि जो निर्णय लिया वह सही था।जब एनडीए की सरकार थी तो जितना काम अल्पसंख्यकों के लिए जितना काम किया गया उतना काम कही नही किया गया।भागलपुर दंगो की फिर से जांच कराई।सीआईडी को लगाया।29 ऐसे केस सामने आए जिसमे प्रमाण होते भी बिना आरोप के चार्जशीट कर दिया गया था।मैंने फिर से जांच करवाई उन्हें मुआवजा दिलवाया।पहले ढाई हजार मुआवजा प्रतिमाह दिलवाया बाद में 2013 से पांच हजार प्रतिमाह करवाया।कब्रिस्तान की घेराबंदी सुनिश्चित कार्रवाई।मुस्लिम महिलाओं के लिए हुनर कार्यक्रम शुरू किया।साम्प्रदायिक सदभाव बनाये रखने की जिम्मेवारी।डीएम और एमपी को दिया।अल्पसंखयकों के लिए कई काम किया। हम जुबान से कम बोलते है मेरा काम बोलता है।जो लोग सेक्युलरिजम की बात करते है वो देखे की सेक्युलरिजम क्या होता है।मैं आलोचना से नही घबराता हु।
मैं समाज के हर तबके लिए काम करते है।सेक्युलरिजम का चादर ओढ़ कर कोई भरस्टाचार करे यही सेक्युलरिजम है क्या।नोटबन्दी का समर्थन किया।लोग खुश थे तब हमने बेनामी सम्पति पर भी सर्जिकल स्ट्राइक की बात की लेकिन जब कार्रवाई हुई तो मैं क्या करते लोग अहंकार की भाषा बोलते थे कि हमने बना दिया..मैं तो पटना में था जिसने दिन दिल्ली में घोषणा किया तो मैं तो पटना में था।उन्हें डर था कि जेडीयू और कांग्रेस अकेले चुनाव में उतर जायेगा।कहे कि जहर का घूंट पीने की बात कही क्या मैं जहर था जब पटना विवि में लालू जी चुनाव लड़ रहे थे तो मैं सायन्स कॉलेज में था 500 वोट थे जिनमें से 440 वोट मैंने लालू जी को दिलवाया।
आज कह रहे है कि 1991 में मर्डर की बात कर रहे है।कर्पूरी ठाकुर की मौत के बाद मैंने सभी विधायकों को गोलबंद किया।शिवानंद तिवारी का नाम।लिए बिना कहे कि सबसे ज्यादा तकलीफ उन्ही को है।
जब सरकार बन गई तो कार्यकर्ता नारा लगा देते थे कि लालू नीतीश जिंदाबाद तो भी लालू जी को बुरा लग जाता था।खुद गरज में एलान किया।हमारे समर्थको ने खुल कर साथ दिया ,लेकिन उनके वोट नही मिले शायद उनका प्रभाव नही था।अहंकार बुरी चीज है।2010 का परिणाम सबके सामने है तब पासवान जी उनके साथ थे लेकिन अब तो वो भी साथ नही है। मैं आलोचना झेलने के लिए तैयार हूं खासकर कुछ बुद्धिजीवियों के जो मुझे बेसलेस कहते है। अच्छा है उन्हें आजादी है।अगर कास्ट बेस को कुछ लोग मास वेस समझते है तो वो गलत है। मैंने जो भी निर्णय लिया है वह अपनी पार्टी के फैसले के आधार पर लिया है। महठबंधन की सरकार 20 महीनों की चली लेकिन हम विकास के कामो में हमने कोई कोताही नही की।लेकिन गवर्नेंस के कामो में हस्तछेप होता रहा।नीचे के कामो में उसका असर जरूर पड़ा।
मिट्टी में मिल जाएंगे बीजेपी के साथ नही जाएंगे ….लेकिन वो उस वक़्त के संदर्भ में था।यह बिहार के हित की बात थी।
19 नेशनल एक्जीक्यूटिव की मीटिंग है।उसमें कई मुद्दों पर चर्चा होगी सवाल था .क्या राम मंदिर बनेगा।
हमने वचन दिया है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में गोपालकृष्ण गांधी को समर्थन करेंगे।
2019 में मोदी जी से मुकाबला करने की छमता किसी मे नही है।दूसरा कोई विकल्प नही है।
बालू माफिया के सवाल पर ..अब कार्रवाई का वक़्त है।किसी को बख्शा नही जाएगा।
अब आर्थिक अपराध इकाई के अधिकार बढ़ाई जाएगी।
फ्रेश चुनाव कोई विकल्प नही था
न हम किसी को फसाते है और न बचाते है
शरद यादव की नाराजगी पर…..लोकतंत्र में विचार होते है।मेरी पार्टी राज्य की पार्टी है और राज्य कमिटी ने यह निर्णय लिया है।और मैं राष्ट्रीय अध्यछ होते हुए उपस्थित थे।अब 19 को मीटिंग है उसमें सभी लोग अपनी बात रख सकते है।निर्णय बहुमत का होता है ।व्यक्तिगत विचार सभी रख सकते है।
राहुल गांधी के बयान पर
खुशी की बात है कि उन्हें 3 महीने पहले अहसास हुआ था, लेकिन जब मैं मिलने गया था तब तो पता नही चला।जब राजगीर में था तो राहुल गांधी का फोन आया था।बात किया तो दिल्ली में मिलने की बात तय हुई।दिल्ली में 40 मिनट तक बात किया।सभी बातें उनके सामने रखी थी।लेकिन कहा रहा कोई रिस्पॉन्स।
असम में मेहनत किया यूपी में मेहनत किया लेकिन क्या फायदा मिला।आपके3 साथ मिलकर काम करने की कोशिश की लेकिन क्या मिला मैंने पहले भी कहा था सहयोगी हो सकता हूँ लेकिन फॉलोवर नही….
सवाल..2013और अब में क्या अंतर आया है बीजेपी में ..
दूसरे तरफ (यानी महागठबंधन) ज्यादा असहज थे नेशनल एकजीयूटिव की बैठक में आगे का तय करेंगे। सवाल क्या एनडीए की सरकार में शामिल होंगे जवाब अभी सब कपोल कल्पना है

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