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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी को एक बार फिर भोज का निमंत्रण दिया है जिससे राजनीतिक महकमों में हलचल मच गई है। राजनीतिक पंडितों ने राजनीतीक कयास भी लगाने शुरू कर दिये हैं। इधर बीजेपी को वो दिन भी याद आ गया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2009 में भोज देकर रद्द कर दिया था। बीजेपी नेता और केंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह ने तो यहां तक कह दिया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हैं तो भोज में जाना चाहिए। बिहार की राजनीति एक बार फिर भोज पर आकर रुक गई है। सीएम की तरफ से मिले निमंत्रण को लेकर कुछ नेता तो असमंजस की स्थिति में हैं तो कुछ इस भोज में जाने को आतुर हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार ने माफी नहीं मांगी है तो इस भोज में नहीं जाना चाहिए।

इस भोज में जाने के लिए बिहार बीजेपी प्रवक्ता संजय मयुख को अपने सीनियर नेताओं से फोन पर राय मशविरा करते हुए सुना गया है। अपनी बेबाक छवि के लिए मशहूर मयूख ने शायद बीजेपी के वरिष्ठ नेता नन्द किशोर यादव से इस मुद्दे पर बात भी की है। वैसे जब भी कोई बयान देना होता है तो मयूख बेधड़क बोलते हैं, लेकिन सीएम नीतीश कुमार के भोज में जाने को लेकर वह इस तरह से असमंजस में थे कि इन्हें अपने बड़े नेता से पूछना पड़ा। उसके बाद उन्होंने लड़खड़ाते हुए शब्दों में सीएम के भोज में जाने की बात स्वीकारी।

नीतीश कुमार ने 27 मार्च को दोनों सदन के सभी सदस्यों को भोज पर आमंत्रित किया है। इसके लिए उन्होंने बीजेपी के नेताओं को भी निमंत्रण दिया है। अब बीजेपी के नेता उस बात को भी याद कर रहे हैं, जब नीतीश कुमार ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर भोज रद्द कर दिया था। अब जब एक बार फिर सीएम ने निमंत्रण दिया है तो बीजेपी नेताओं के लिए असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।बीजेपी के हार्डकोर नेता, जो 2009 में राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य थे वो उस समय नीतीश कुमार की तरफ से भोज रद्द करने वाली बात को नहीं भूल पा रहे हैं।

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