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रोहतास- भूत-प्रेत, झाड़-फूंक आदि भौतिक बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए एक सप्ताह तक लगने वाले शाहाबाद के प्रसिद्ध देव स्थान घिंन्हु ब्रह्म मेला में इन दिनों श्रदालुओं का तता लगा हुआ है। जहां दर्जनों तांत्रिक ओझा गुनी अपनी करिश्माई करतूतों के बदौलत अंधविश्वासी पुरषों एवं महिलाओं को आर्थिक एवं मानसिक रूप से शोषण कर रहे हैं। वहीं चिलचिलाती तेज धूप के बावजूद यहां पहुंचे हजारों श्रदालुओं के लिए प्रशासन ने न तो अतीथि शाला एवं सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम किया है और न ही पीने की स्वच्छ पानी,बिजली और स्वास्थ्य सेवा आदि की कोई व्यवस्था की गई है।

यहां धर्म के नाम पर तांत्रिकों द्वारा लोगों को नचाया, हंसाया और कूदफान कराया जाता है। जिस तरह से यहां की महिलाएं हरकत करती हैं। लगता है की सचमुच में इन पर कोई प्रेत आत्मा का साया हो| लोगों के सामने जिस तरह से जीवों की निर्मम हत्या होती है, बली दी जाती है। क्या इस तरह के वाकया से प्रेत आत्माएं शांत हो पाएंगी| चिलचिलाती धूप में नाबालिग बच्चियां और युवतियां इस महाजाल में भ्रमित हैं। यहां पर धर्म के नाम पर तांत्रिकों द्वारा महिलाओं को शारीरिक कष्ट दिया जाता है जिसे देख कर उन-पढ़े लिखे लोगों पर हंसी आ जाती है जो विस्वास करते हैं। जिसको जहां जगह मिला वह वहीं अपना रेवती या टेंट लगाकार शुरू हो गया। कुछ लोग तो मंदिर के भीतर भी अपना झाड़-फूक करवाते हैं |

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कहा जाता है की महिलायें तो अंधविश्वास में काफी भरोसा करती हैं लेकिन इसमें देखने से लगता है की पुरुष को भी प्रेत आत्मा अपने साए में ले रखी है | झाल ढोलक के धुनों पर साड़ी पहनकर नाचता युवक इस बात को साबित करता है की कितना भी विज्ञान आगे बढ़ जाए, भले ही प्रधानमंत्री डिजिटल इण्डिया बनाने की बात करते हो लेकिन देश का युवा कही ना कही आज भी डिजिटलाइजेशन के इस दौर में बहुत पीछे हैं। परिजनों के सामने सारा लोक-लाज छोड़ कर जिस तरह युवतीयां झूम रही हैं मानों विश्वास ही नहीं होता कि सचमुच क्या इस उम्र में भी ये हो सकता है | तांत्रिक सुमन सिंह ने बताया कि है की प्रेतात्मा का साया होता है लेकिन ये सिर्फ 50% ही सत्य है बाकि सब ढोंग है | जीव बली और शराब चढ़ाने से प्रेतात्मा शांत नहीं होते हैं |

यूपी के बलिया जिला से आये सोनू कुमार ने बताया कि यहां शारीरिक कष्ट दूर होने को लोग मानते हैं लेकिन सिर्फ 50 % ही, बाकी लोग यहां जान बुझ कर भ्रम किये हुए है, महिलाओं के सुरक्षा के नाम पर यहां कुछ नहीं है सिर्फ शोषण हो रहा है। किसी भी महिला का इज्जत यहां सुरक्षित नहीं है | व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं है। न ही बिजली और न पानी,न ही स्वास्थ और सुरक्षा सेवा का कुछ प्रावधन। दाउदनगर से आये तेजस्वी पासवान तो बाबा के आस्था में विस्वास करते हैं लेकिन व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं है सिर्फ लुट खसोट मचा हुआ है। श्रद्धालु संगीता देवी कहती है की शादी से पहले तो मै इन चीजों पर विश्वास नहीं करती थी। लेकिन जब मेरी तबियत खराब होने लगी तब से करीब पांच साल से यहां आती हूं। अभी ठीक हूं | संगीता भी मानती है की सौ में सिर्फ 25% ही सही होते है |

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बरहाल जो भी हो ये सारे मनो रोग से ग्रसित हैं| कहा जाता है की घिन्हू ब्रहम में काफी शक्ति है| फिलहाल इस चर्चित घिंन्हु ब्रह्म के स्थान सहित चारों ओर स्थापित छोटे-छोटे देव स्थानों के इर्द-गिर्द मल मूत्रों एवं कूड़े-कचरों तथा गंदगी के अंबार के बीच ही मेला में श्रदालुओं की भीड़ घिंन्हु ब्रह्म के दर्शन करने पर मजबूर है। वर्ष में दो बार इस मेले में दर्शनार्थ राज्य के विभिन्न हिस्सों सहित पड़ोसी राज्यों से भी श्रदालुओं की भीड़ रामनवमी एवं दशहरा के समय आती है। पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों की आड़ में तथाकथित ओझाओं द्वारा अपने प्रपंची मोह जाल में फंसाकर अवैध एवं गैरकानूनी तरीके से शिक्षित व अशिक्षित पुरुष , महिलाएं व गरीबों एवं पूंजीपति अंधविश्वासों का शारीरिक मानसिक व आर्थिक दोहन जारी है । लोगों को तरह-तरह से बहकाना फुसलाना ही मुख्य व्यवसाय बना हुआ है।

यह प्रसिद्ध देव स्थान रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर तथा संझौली प्रखड क्षेत्र के खैरा भूतहा ग्राम के समीप सुनसान बगीचे में करीब दो-तीन बीघे जमीन में फैला हुआ है। यह क्षेत्र वर्तमान में धार्मिक आस्था से ओत-प्रोत घिंन्हु बाबा के प्रति लोगों के आपर श्रद्धा एवं विस्वास को परलक्षित करता है किन्तु भौतिकवादी इस यूग में कथित ओझागुणी इस मेले की आध्यात्मिक प्रांसगिकता पर सवालिया निशान भी लगा रहे हैं।

मेले के भ्रमण के दौरान शैतानी आत्माओं को अपने वश में करने की प्रवति से ओझाओं द्वारा औरतों को रुलाते, हंसाते जैसे भयानक परिदृश्य देखनो को मिल रहा है। कहा जाता है कि इस देव स्थान पर महिलाएं युवती एवं पुरुष के आते ही उनपर सवार भूत खेलने लगते हैं। जिसे ओझाओं द्वारा अनेक प्रकार के अनुष्ठान कर वही शैतानी आत्मा को बांध दिया जाता है। भूत प्रेत के ठीकेदार ओझा असाध्य बीमारियों, जटिल से जटिल समस्या, भूत-प्रेत, मनोकुल इच्छाओं को पूरा कराने से लेकर बच्चा पैदा कराने तक की जिम्मेवारी अपने नाम ले लेते हैं। ऐसे में सैकड़ों लोग अन्धविश्वास के काले छाये से ग्रसित होकर अपने बीमार परिजनों के साथ इस प्रसिद्ध देव स्थान पर आकर ओझाओं के करिश्माई करतूतों के समक्ष घुटने टेकते नजर आ रहे हैं। इसी अंधविस्वास का नजायज फायदा उठाकर ओझागुणी बीमार एवं मजबूर औरतों एवं पुरषों को अपना शिकार बनाकर उनका आर्थिक दोहन करते हैं तथा झाड-फूंक को प्रत्येक वर्ष यहां अपना व्यवसाय बनाते हैं।

अनेक प्रकार के रोगों से ग्रसित महिलाएं भूत-प्रेत खेलते हुए तथा उनको नचाते ओझा इस मेले में मुख्य आकषर्क का केंद्र हैं। इस कार्य को अंजाम देने वाले दर्जनों ओझा, गुणी एवं तांत्रिक इस व्यवसाय से सालों भर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। मेले में आए लोगों ने बताया की अन्नायओं के इच्छापूर्ति के लिए पहले देशी शराब चढ़ाई जाती थी, लेकिन देशी व विदेशी शराब पर प्रतिबंध लगने से अब बगैर शराब के केवल मुर्गा, सूअर के बच्चा, कबूतर, अंडा आदि ही चढ़ाई जा रही है। जो उच्ची कीमत पर बिक रहा है। बताया जाता है कि प्रत्येक वर्ष इस मेले में करीब पांच से सात हजार से अधिक जानवरों को बली दी जाती है। लेकिन प्रसिद्ध घिंन्हु ब्रह्म मेले में राज्य सहित अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं को सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं मिलता ,जबकि यहां पहुंचे श्रद्धालुओं से कर की वसूली की जाती है। प्रशासन द्वारा पानी , बिजली, स्वास्थ्य तथा सुरक्षा इंतजामों के कमी के कारण दूर-दूर से आए श्रद्धालु रात के अंधेरे में खुले अकाश के नीचे रहने को विवश हैं।

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पुत्र प्राप्ति के नाम पर ओझा महिलाओं को इलाज करने के बहाने उन्हें ले जाकर उनका शारीरिक एवं मानसिक दोहन भी करते हैं। ऐसे मामले तब प्रकास में आते हैं जब वे लोग पूरी तरह से लूट लिए जाते हैं । अंधविस्वास के दलदल में फंसी औरते और पुरषों को आकर्षित करने हेतू ये ओझा कई तरह के कारनामे यहां दिखा रहे हैं, जो माथे पर भभूत ,बेढंगा वस्त्र के साथ-साथ लोगों से बात करने के दौरान वाणी में बदलाव लाना शामिल है, जिसे देखकर निरक्षर अंधविस्वासी ही नहीं बल्कि आशावादी भी उनके चंगुल में फंस जा रहे हैं।

इस चर्चित देव स्थान घिंन्हु ब्रह्म के संबंध अनेक प्रकार के गथाए भी हैं । जिसमें एक चर्चा यह है कि घिंन्हु ब्रह्म निकट के माधोपर गांव के निवासी थे। अपने ससुराल खिरोधर पुर जाने के क्रम में पवनी ग्राम की एक डायन ने उन्हें उक्त स्थल पर मार डाला । बताया जाता है कि मरते वक़्त बाबा ने पानी की मांग की पर पवनी गांव की किसी व्यक्ति ने उनका प्यास नहीं बुझाया, पर उसी रास्ते से जा रही रौनी गांव की एक महिला ने उनको पानी पिलाया । अपनी प्यास की तृप्त बुझाने के साथ ही बाबा पवनी की क्षय और रौनी की जय कहकर प्राण त्याग दीये। ग्रमीणों के अनुसार तब से पवनी ग्राम का विनाश होने लगा । जब यह खबर बाबा के ससुराल पहुंची तो उनकी पत्नी भी चीते में जलकर सत्ती हो गई। उक्त समय से ही बाबा ब्रह्म के रूप में और पत्त्नी सत्ती के रूप में स्थापित हो गयी। जिनके नाम से मन्दिर का निर्माण भी कर दिया गया । यह घटना सैकड़ो वर्ष पुरानी बताई जाती है। लोगो का कहना है कि पवनी ग्राम की विनाश की प्राथमिकता इस बात से सिद्ध होता है की आज भी वहा कुंआ की खुदाई करने पर गृहोपयोगी वस्तुओ के अवशेष मिलते हैं। घिंन्हु ब्रह्म के अतिरिक्त दर्जनों की संख्या में अन्य छोटे-छोटे देव स्थान स्थापित किये गये है। इस सबंध में लोगों का कहना है कि यहां कई ताकतवर आत्माओं को ओझा-गुणी द्रारा यहां बांध दिया जाता है।

राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों का कहना है कि सुशासन की सरकार में भी कई सुविधाओं से महरूम है। इसके आलावा सुरक्षा के लिहाज से कोई व्यवस्था नहीं की गई है और न ही रात्रि समय पुलिस द्वारा कोई गस्ती की जाती है, जिससे खतरा उत्पन्न होने की आशंका हमेशा बना रहता है। हालांकि आज भी समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, भूत-प्रेत जैसे चक्करों में उलझा हुआ है। ऐसे लोगों में गरीब और अनपढ़ की संख्या ज्यादा है। राज्य के शायद ही कोई गांव या शहर ऐसा होगा जहां लोग अंधविस्वास से बचे हो । सदियों पुरानी अंधविश्वासी प्रथाएं यहां किस तरह से लोगों के दिलो-दिमाग में छाई है , इस देव स्थान पर देखा जा सकता है। फिलहाल चर्चित इस घिंन्हु ब्रह्म मेले में ओझा गुणियों एवं तांत्रिकों की इन दिनों चांदी कट रही है, वहीं घिंन्हु ब्रह्म के दर्शन हेतू श्रदालुओं की भीड़ दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। भले ही बिहार में पूर्ण शराब बंदी हो चुकि है लेकिन बाबा के मेले में सब मिलता है परंतु छुप-छुपाकर।

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