लालू यादव पिछले कुछ दिनों से अचानक के विवादों में घिरते दिख रहे हैं।लगातार राजनीतिक हमले और लालू यादव का परिवार सभी को जवाब देते परेशान।लालू यादव की पार्टी का स्थापना दिवस और इस मौके पर लालू के स्वभाव के कई आयाम एक साथ दिखे,जहां डर, संशय,आक्रोश हर कुछ था।

इसमें कोई दो मत नही की लालू यादव के समर्थक लालू यादव को देखने और सुनने एक बुलावे पर आते हैं।मौका राष्ट्रीय जनता दल के 21वें स्थापना दिवस समारोह का था,और लंबे अरसे से विवाद और आरोप से घिरे लालू यादव को एक सार्वजनिक मंच मिला।लालू यादव और उनके पुत्रों की कोशिश इस मंच से समर्थकों की हौसला अफजाई जे साथ विरोधियों को जवाब देने की रही।लालू यादव ने माइक सम्भालते हमला bjp पर शुरू किया,27 अगस्त को लालू ने रैली का आयोजन किया है।इस रैली से राष्ट्रव्यापी बीजेपी विरोधी गोलबन्दी तैयार कर एक नई लड़ाई की शुरुआत की है।लालू ने दूसरे राज्यों में बन रहे बीजेपी विरोधी समीकरण का भी दिया हवाला।

खास बात ये की आरोपों में घिरे लालू को अब सालने लगा है जेल जाने का डर,ये पहला मौका था जब लालू ने समर्थकों से ये पूछा कि अगर रैली के पहले हम जेल चले गए तो क्या और सभी ने कहा रैली होगी।

राष्ट्रपति चुनाव पर भी लालू ने दोनों उम्मीदवार की विवेचना कर अपना स्टैंड साफ कर दिया।नीतीश कुमार से खुद को इस मुद्दे पर बिल्कुल अलग बताया।लालू यादव का मकसद एक दिखा की जो आरोप लग रहे हैं उसमें अपनी स्थिति समर्थकों के सामने स्पष्ट की।मीडिया पर भी लालू के चाहे अनचाहे गुस्सा बाहर आया।

इधर बीजेपी ने लालू के तमाम दलील और गोलबन्दी की कोशिश को सीधे नकार दिया।बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि लाली येन केन सत्ता में रहना चाहते हैं ।कोई गोलबन्दी नरेंद्र मोदी के सामने नही चलेगी।

तो लालू का अपना अंदाज़ विरोधियों को जवाब देने का,मगर क्या लालू के ये जवाब उन्हें विवादों से बाहर निकल पायेगा।

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