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पटना: अब बिहार राज्य में क्रिकेट के ‘अच्छे दिन’ आ गए हैं अब बिहार की क्रिकेट टीम भी रणजी ट्रॉफी में खेलेगी. बिहार को पूर्ण सदस्य का दर्जा मिल जाने के कारण यह संभव हो पाया है. गौरतलब है कि बीसीसीआई में सुधार के लिए गठित की गई लोढ़ा समिति की सिफारिश पर अमल शुरू हो गया है.

इस मामले में पिछले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की सभी सिफारिशों पर अमल करने के आदेश दिए थे. उसी आदेश का नतीजा है की यह कमिटी बिहार क्रिकेट के लिए वरदान बनकर सामने आई है. इस कमिटी की सिफारिशों के आधार पर अब बिहार को बीसीसीआई में पूर्ण सदस्य का दर्जा मिलेगा. इसका मतलब साफ है कि अब बिहार क्रिकेट संघ बीसीसीआई के चुनावों में वोट डाल सकेगा. बिहार के खिलाड़ी इन सुविधाओं से विगत 2001 से वंचित थे लेकिन अब बिहार रणजी ट्रॉफी में भी खेल सकेगा और अन्य राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी कर सकेगा.

गौरतलब है की 2001 में तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने बिहार क्रिकेट संघ को अयोग्य घोषित करके झारखंड क्रिकेट संघ को मान्यता दे दी थी. बिहार क्रिकेट संघ को 19 फरवरी को बीसीसीआई ने सह सदस्य मान लिया था, लेकिन इसमें एक पेंच फंसा था लोढ़ा समिति की सिफारिशों के मुताबिक बोर्ड में कोई भी पदेन मंत्री या नौकरशाह पद नहीं ले सकता है. संघ के अध्यक्ष अब्दुल बारी सिद्दीकी को बिहार क्रिकेट संघ छोड़ना होगा या फिर उन्हें राज्य के वित्त मंत्री का पद छोड़ना होगा. वर्तमान में पूरे देश में सिर्फ बिहार ही ऐसा राज्य संघ है जिसके अध्यक्ष को लोढ़ा समिति की सिफारिशों के कारण हटना होगा.

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