पटना : बिहार के सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लाख दावे कर ले लेकिन हकीकत में स्वास्थ्य सेवा में आज भी कमी दिखाई पड़ती है। इसी कमी से सामना हुआ पटना के फुलवारीशरीफ के जानीपुर इलाके में रहने वाली 42 वर्षीय शाहनाज बानो का। शाहनाज बानो की कहानी एक बार बिहार के स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती नजर आ रही है। पटना जंक्शन के मात्र 16 किलोमीटर स्थित फुलवारीशरीफ ब्लॉक के जानीपुर इलाके में आज भी लोगों समूचित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही है। यहां के स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं समेत अन्य सुविधायों की भारी कमी देखने को मिलती है।

जानीपुर के रहने वाले मो. नसीम मियां की पत्नी शहनाज बानो भी सरकार के इस फेल होते सिस्टम की शिकार बनी। नसीम और शाहनाज के 6 बच्चे हैं। बड़े बेटे की शादी हो चुकी है वह इस इलाके अधकांश लोगों की तरह गुजरात में मजदूरी कर कुछ पैसे कमाता है, जिसे किसी तरह किसी तरह जीवनयापन चलता है। वहीं शहनाज की एक बेटी की भी शादी हो चुकी है बाकी चार बच्चे अभी पढ़ाई ही कर रहे हैं। वहीं नसीम बेरोजगार हैं। 2 साल पहले उन्हें पोलियो का अटैक आया था जिसके बाद से वे घर पर ही रह रहे हैं। ऐसे में घर की पूरी जिम्मेदारी शहनाज बानो के कंधे पार रहती है।
शहनाज एक इम्प्रोविंग हेल्थ एंड न्यूट्रिशन स्टेटस ऑफ वीमेन एन्ड चिल्ड्रेन प्रोजेक्ट के महिला संगठन की सदस्य भी हैं, जिसका संचालन ऑक्सफेम की मदद से CHARM करता है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं को स्थिति को दुरुस्त करना है। इस प्रोजेक्ट से जुड़ी महिलाओं को नवजात बच्चों और उनकी माँ के बेहतर स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाती है। इस संगठन से जुड़ी होने के कारण शहनाज को स्वास्थ्य संबंधी अपने अधिकारों की भी जानकारी है। इसकी वजह से फुलवारीशरीफ के पीएचसी में दयनीय स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ शहनाज ने अपनी आवाज उठायी।
दरअसल शहनाज को एक बार पेट दर्द की शिकायत हुई जिसके बाद उसे इलाज के फुलवारीशरीफ पीएचसी ले जाया गया जहां उसे दवा खाकर 4 दिन बाद वापस आने को कहा गया। उस समय शहनाज को दवा नहीँ दी गयी और बाजार से खरीदने को कहा गया। शहनाज बताती हैं कि उसने जब पीएचसी कर्मी से दवा की मांग को तो उसे कहा गया दवा बाजार से खरीद लो वहीं उसे प्राइवेट पैथोलॉजी से कुछ जांच करवाने को भी कहा गया।
दवा खाने के बाद भी शहनाज की तबीयत में सुधार नहीं हुई तो जब वो दोबारा पीएचसी में गयी तो डॉक्टर ने गॉल ब्लैडर और यूटरस में दिक्कत होने की बात कह कर उसे पीएमसीएच या किसी अन्य प्राइवेट अस्पताल में जाने की सलाह दे दी गयी।
शहनाज बताती हैं कि जब वह इलाज के लिए पीएमसीएच गयी तो वहां के हालात देखकर और हैरान रह गई। राज्य से सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीज जमीन पर पड़े हुए है। उनको देखने वाला कोई नहीं था। मुझे अपनी बीमारी के लिए कुछ जरूरी जांच कराने थे जो कि सरकारी अस्पताल में नहीं हुए इसकी वज़ह से मुझे प्राइवेट पैथोलॉजी में 10रुपये खर्च करने पड़े। किसी तरह मैन पैसे उधार लेकर प्राइवेट अस्पताल में गॉल ब्लैडर और यूटरस का आपरेशन कराया।
शहनाज कहती हैं कि उनके साथ हुई ये घटना आये दिन सरकारी अस्पताल के मरीजों के साथ होती रहती हैं जिसकी वजह से लोगों को निजी अस्पताल और मेडिसीन दुकानों का चक्कर लगाना पड़ता है। सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार क्व कितने दावे कर लें लेकिन हकीकत तो कुछ और ही है।

loading...

LEAVE A REPLY