चुनाव आयोग ने एकबार फिर बड़ा फैसला किया है. 5 राज्यों के विधानसभा के दौरान सभी राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव आयोग से evm मशीन में छेड़-छाड़ का आरोप लगाया था. वकील मनोहर लाल शर्मा ने तो सुनवाई के लिए और जाँच करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा दिया. हलांकि इस दायर याचिका पर सुनवाई होना बाकी है.

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पार्टियों के द्वारा लगाए गये EVM विवाद के बाद चुनाव आयोग ने कहा था कि मशीन को 2 बार चेक किया जाता है. उसे कैंडिडेट के सामने जांचा और सील किया जाता है. काउंटिंग से पहले भी evm को उम्मीदवारों के सामने खोला जाता है. चुनाव आयोग ने तय किया है कि 2006 से पहले खरीदी गईं 9 लाख 30 हजार 430 ईवीएम को बदल दिया जाएगा. क्योंकि पुरानी मशीनों की लाइफ 15 साल होती है.

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आपको बता दे कि 2010 में बीजेपी लीडर जीवीएल नरसिम्हा राव की बुक ‘डेमोक्रेसी एट रिस्क-कैन वी ट्रस्ट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन?’ आई. किताब की प्रस्तावना आडवाणी ने लिखी. उन्होंने इस किताब के प्रस्तावना में लिखा था कि “टेक्नोलॉजी के नजरिए से मैं जर्मनी को मोस्ट एडवांस्ड देश समझता हूं. वहां भी evm के प्रयोग पर बैन लगा चुका है. आज अमेरिका के 50 में से 32 स्टेट में evm पर बैन है. मुझे लगता है कि अगर हमारा इलेक्शन कमीशन भी ऐसा करता है, तो इससे लोकतंत्र मजबूत होगा.”

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