सुकमा में हुए नक्सली हमले में शहीद हुए जवान के परिवारों को दी जाने वाली मुआवजा राशि को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. शहीद हुए बिहार के शेखपुरा जिला स्थित फुलचोढ़ गांव के निवासी सीआरपीएफ के जवान रंजीत यादव की शहादत के बाद बिहार सरकार की एक चूक ने शहीद का अपमान कर दिया है. दरअसल, बिहार सरकार ने शहीद रणजीत के परिवार को 5 लाख रुपये का चेक दिया था. लेकिन HDFC बैंक का यह चेक आज बाउंस कर गया. जिससे शहीद के परिजन काफी नाखुश हैं. वहीँ राज्य सरकार के खिलाफ लोगों में आक्रोश भर गया है.

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चेक बाउंस की जानकारी देते हुए पीड़ित सुनीता देवी ने बताया कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा 26 अप्रैल को 5 लाख रुपये का चेक मुहैया कराया गया था. यह चेक एचडीएफसी शेखपुरा स्थित बैंक खाते का था. लेकिन बैंक गए तो वहां अधिकारियों ने चेक बाउंस की बात कही.

अब शहीद के परिजन राशि का भुगतान पाने के लिए बैंकों का चक्कर लगा रहे हैं. पंद्रह दिन बाद भी शहीद के पीड़ितों के इस परेशानी के लिए कोई ठोस पहल नहीं किया जा सका. लेकिन इसके बावजूद भी इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है.

चेक बाउंस होने की खबर मिलते ही राजद के क्षेत्रीय नेता शहीद के पीड़ित परिजनों से मिलने गए . वहां उन्होंने इस चूक का ठीकरा जिला प्रशासन पर फोड़ा. राजद नेता ने कहा कि शहीद के आश्रितों को सहायता के नाम पर अपनाए जा रहे जिला प्रशासन की दोहरी नीति साफ झलकती है. इस मौके पर शहीद के आश्रितों ने यह मांग करते हुए कहा कि निर्गत किया हुआ चेक को प्रशासनिक पहल अकादमी से अविलंब भुगतान कराया जाये.

इधर, एचडीएफसी के शाखा प्रबंधक अमित कुमार ने बताया कि शेर को अलीगंज स्थित एसबीआइ के मुख्य शाखा में जमा कराया गया था. वहां स्कैनिंग के बाद एसबीआइ के द्वारा क्लियरेंस के लिए इमेज कॉपी बैंक प्रबंधन के द्वारा नोएडा भेज दिया गया था. जहां तकनीकी गड़बड़ी के कारण चेक भुगतान होने में मामूली बाधा पहुंची है. लेकिन इस बाधा का त्वरित निष्पादन के लिए एचडीएफसी के द्वारा टीम गठित कर उसे 24 घंटे के अंदर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है. उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार तक लाभुक के खाते में राशि को हस्तांतरित कर दिया जायेगा.

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