उत्तर प्रदेश में सरकार बने अभी सौ दिन भी नही हुए हैं और बिहार की सरकार को अभी साढ़े तीन साल और चलना है।मगर आपको जान कर आश्चर्य होगा की दोनों राज्य के सिरमौर इन दिनों इन राज्यों में चुनाव किये जाने को लेकर दे रहे हैं एक दूसरे को चुनौती।विधानसभा ही नही लोकसभा के भी चुनाव की चुनौती।
बिहार में नीतीश कुमार और लालू यादव के साथ कांग्रेस की चल रही है सरकार और जब भी इस सरकार पर लगता है कोई आरोप तो बीजेपी यहाँ चुनाव करवाने की करती है मांग।बिहार के बीजेपी नेता तो मांग करते रहते हैं मगर राजनितिक बवंडर तब उठा जब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने बिहार आकर ये मांग की।रविवार को पटना में बीजेपी केंद्र में अपने तीन साल पूरे होने का जश्न मना रही थी,मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य थे और मौर्य ने दे डाली नीतीश कुमार को चुनौती,जिन लोगों के साथ और जिस तरह नीतीश कुमार सरकार चला रहे हैं वो ठीक नही और अगर है हिम्मत तो बिहार में अभी विधानसभा चुनाव कराकर देख ले नीतीश ।
ये ब्यान काफी था बिहार के राजनितिक सरगर्मी को हवा देने को।जवाब देने मैदान में और कोई नही खुद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उतरे।मौका था लोक संवाद का और उसके बाद हुए संवाददाता सम्मेलन में पहले तो नीतीश कुमार ने दी एक नई चुनौती की बिहार में विधान सभा चुनाव करवाने के लिए तैयार हैं मगर उत्तर प्रदेश में भी फिर हो चुनाव और साथ हीं बिहार उत्तर प्रदेश के लोक सभा सीट के भी उपचुनाव हो जाएँ।
चुनाव की चुनौती पर शांत नही हुए नीतीश कुमार,गुस्सा इतना की निशाने पर बीजेपी के राष्ट्रिय अधतक्ष और महात्मा गांधी पर उनके दिए ब्यान भी थे।उन्होंने गांधी के बहाने अमित शाह तो भी निशाने पर लिया ।
इसे कहते हैं बेवक़्त की शहनाई , चुनाव के दूर दूर तक फिलहाल आसार नही मगर राज आईटीआई होनी है और तपिश बनाये रखनी है तो चुनौती का दौड़ चलाये रखो सो फिलहाल बीजेपी और महागठबंधन के बीच तो पिछले कुछ वक़्त से यही हो रहा है।
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