जे ईई मेन के बाद अब एडवांस का नतीजा सामने आ गया है .बिहार का डंका एक बार फिर बजा है .इस बार बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद की सुपर ३० में २० में से १९ छात्रो ने सफलता प्राप्त की है तो आनंद सुपर ३० के ३० में से ३० छात्रो ने सफलता प्राप्त की है . वर्षो पहले एक साथ सुपर ३० की स्थापना करने वाले आनंद और अभयानंद आज अलग अलग संसथान चलाते है लेकिन अगर सफलता की बात करे तो आज भी दोनों सुपर ३० से गरीब घर लाल आई आई टी में जाने का सपना पूरा करता है .रविवार को इन दोनों संस्थानों में जश्न का माहौल था . फुले नहीं समां रहे थे वो पिता जिन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था की उनका बेटा इंजिनियर बन पायेगा .किसी के पिता अंडा बेचते है तो कोई कमपाउन्दर का बेटा है .

नाम श्रेयस  राज पता गया ..श्रेयस के पिता पेट्रोल पम्प पर गाडियों में पेट्रोल डीजल भरते थे वो नौकरी भी चली गई थी ..तब से बड़ी मुश्किल से घर का खर्चा निकलता था .लेकिन पढने में बहुत तेज श्रेयस अपनी पढाई करना चाहता था .इंजिनियर बनना चाहता था और यही सोचकर वह बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद के निर्देशन में चलने वाले अभयानंद सुपर ३० में पंहुचा .इंटरेस में पास होने के बाद अभयानंद के निर्देशन में आई आई टी की तैयारी की और वह ४८७ रैंक लाकर पुरे बिहार का दूसरा टॉपर बन गया है .इसी तरह मनीष जिसके पिता एक नर्सिंग होम में काम करते है उसने भी अभयानंद सुपर ३० में तयारी की और आज उसे सफलता मिली है .दरअसल इस बार अभयानंद सुपर ३० के २०  में से १९ बच्चो ने सफलता प्राप्त की है. इस सफलता पर न सिर्फ छात्र बल्कि खुद अभयानंद भी काफी खुश है . न्यूज़ २४ से बात करते हुए अभयानंद ने कहा की पहले से ज्यादा बेहतर परिणाम आया है और लडको ने भी काफी मेहनत की है . हालाँकि अभयानंद ने कहा की हमें गरीबी को बेचना नहीं बल्कि गरीबी को भागना है इसलिए हम ऐसे बच्चो को साथ लेते है जो गरीब होते है लेकिन मेधा के मामले में वो बहुत अमीर होते है.

आनंद के सुपर ३० को आई आई टी का हब कहा जाता है . पिछले एक दशक से हर साल जब भी आई आई टी का रिजल्ट आता है आनंद के घर जश्न का माहौल होता है . इस बार भी कुछ ऐसा ही नजारा था . रविवार को आये एडवांस के नतीजो में आनंद सुपर ३० के ३० में से ३० बच्चो ने सफलता के झंडे गाड़े है . आनंद जिन बच्चो को पढ़ाते है वो काफी गरीब परिवार से आते है .वो कैसे होते होंगे इसका अंदाज़ा आप नालंदा के रहने वाले मोहम्मद अरबाज आलम से लगा सकते है . अरबाज आलम के पिता मो शकील अहमद बिहारशरीफ में अंडा बेचते है . कोई स्थाई दुकान नहीं है जहा जगह मिली वही दुकान लगा देते है . शकील को अपने बेटे की लग्न और उसकी पढाई देखकर एक ही चाहत होती थी की उनका बेटा बड़ा आदमी बन जाए .अरबाज़ भी पिता के ख्वाबो को सच में बदलना चाहता था और इसी के लिए उसने आनंद सुपर ३० में फोरम भरा .इंटरेस टेस्ट में पास हुआ और साल भर आनंद के साथ रहकर पढाई की . अरबाज़ के मुताबिक् उसका न सिर्फ रहना खाना पीना बल्कि उसे कपडे भी आनंद दिया करते थे .आज उसने सफलता प्राप्त की है लेकिन अपनी इस सफलता का असली हकदार वह आनंद और अपने पिता को देता है .अरबाज़ के अनुसार उसे एडवांस में ६५ पी एच रैंक मिला है .अरबाज़ के अलावाआदित्य आनंद भी आज बहुत खुश है . आदित्य के पिता एक कंपनी में छोटे कर्मचारी है लेकिन आदित्य ने भी आज सफलता प्राप्त किये है . आदित्य के अनुसार उसने कभी नहीं सोचा था की वह भी इंजिनियर बन पायेगा बल्कि सारा ध्यान केवल अपनी पढाई पर दिया. पटना के कंकरबाग के रहने वाले योग शिछाक दीपक प्रसाद तो फुले नहीं समां रहे है उनके बेटा केवलिन ने भी सफलता प्राप्त की है . दीपक प्रसाद कई घरो में योग सिखाने जाते है वही से हुई आया से घर का दाना पानी चलती है .लेकिन आज आनंद सर के कारन उनके घर में आनंद की बारिश हो गई है .आनंद ने इस अवसर पर एक घोषणा भी की आनंद ने कहा की वाब वो छठी क्लास से एक स्कुल खोल रहे है जहा छठी क्लास से ही बच्चो को पढाई की जायेगी

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