किसी भी राज्य को चलाने में नौकरशाहों की अहम भूमिका होती है. शासन की मंशाओं और नीतियों का विधिवत क्रियान्वयन नौकरशाहों यानी आईएएस अधिकारियों का ही दायित्व होता है. आईएएस अधिकारियों की इन दिनों बिहार में कमी है. जिसके कारण मौजूदा आईएएस अधिकारी काम का भारी दबाव महसूस कर रहे हैं. काम का दबाव कम करने के लिए बिहार प्रशासनिक सेवा के 47 अधि​कारियों को आईएएस के तौर पर पदोन्नत किया जा सकता है.

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सूत्रों के मुताबिक चर्चा है कि सामान्य प्रशासन विभाग अधिकारियों की सूची पहले ही तैयार कर चुका है. इस सूची को संघ लोक सेवा आयोग की मंजूरी के लिए विभाग अप्रैल माह के आखिर तक भेज सकता है. अनंतिम सूची में 67 अधिकारियों की नाम शामिल हो सकते हैं.​ बिहार प्रशासनिक सेवा के 29वें बैच से लेकर 31वें बैच तक के अधिकारियों को 2007 की रिक्तियों के बरक्स प्रोन्नत किया जा सकता है.

एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने बताया कि, ‘कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, जो कि राज्य के कार्मिक, शिकायत और पेंशन विभाग के अर्न्तगत आता है, संघ लोक सेवा आयोग की मंजूरी मिलते ही कार्मिक विभाग बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आईएएस बनाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा. पिछले साल जनवरी में भी राज्य कोटे के तहत 38 बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को बतौर आईएएस प्रोन्नत किया गया था. राज्य सरकार ने 2006 बैच के सभी प्रोन्नत अधिकारियों को बाद में संयुक्त सचिव के तौर पर विभिन्न विभागों में नियुक्त कर दिया था. इस वर्ष अधिक रिक्तियों की संख्या को देखते हुए प्रोन्नति पाने वाले अधिकारियों की संख्या भी बढ़ सकती है.’

 

बिहार राज्य के लिए संघ लोक सेवा आयोग की तरफ से कुल 342 आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है. अधिकारियों की पर्याप्त संख्या न होने के कारण राज्य सरकार को एक ही आईएएस अधिकारी को एक से अधिक विभाग देकर काम चलाना पड़ रहा है. उदाहरण के लिए, गृह विभाग के प्रमुख सचिव आमिर सुब्हानी के पास अतिरिक्त प्रभार के तौर पर सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, प्रमुख सचिव निषेधाज्ञा, उत्पाद और पंजीकरण विभाग का भी अतिरिक्त प्रभार है.

इसी तरह, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव डी.एस. गंगवार के पास अतिरिक्त प्रभार के तौर पर प्रमुख सचिव जन शिकायत विभाग, प्रमुख सचिव मंत्रिमंडल निगरानी विभाग, दिल्ली में निवासी अयोग के ओएसडी, बिहार प्रशासनिक सुधार समिति के निदेशक का प्रभार है.

एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने बताया कि सबसे अधिक कमी प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों की है. बताया गया कि प्रमुख सचिव स्तर के 27 पदों की तुलना में सिर्फ 16 अधिकारी ही काम कर रहे हैं. शेष विभागों को अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है. जबकि दो अधिकारी अभी निलंबित भी चल रहे हैं.

जब​कि सचिव स्तर के राज्य में कुल 51 पद हैं, उन पदों पर अभी सिर्फ 19 अधिकारी ही काम कर रहे हैं. 19 में से 9 अधिकारियों के पास अभी विभिन्न विभागों का अतिरिक्त प्रभार है. राज्य को आवंटित 342 आईएएस अधिकारियों की संख्या में से राज्य सिर्फ 238 आईएएस अधिकारी ही ले सकता है जबकि बाकी 104 पदों को उसे राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से भरना होता है. इस वक्त राज्य में सिर्फ 251 आईएएस अधिकारी ही सेवाएं दे रहे हैं. उनमें से भी 42 आईएएस अधिकारी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति और पांच अधिकारी अन्य राज्यों की प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए थे. सेवारत 215 आईएएस अधिकारियों में से 20 अधिकारी दूसरे राज्य के कैडर से प्रतिनियुक्त होकर आए हैं, लेकिन वह मूल निवासी बिहार के ही हैं.

यदि पदोन्नति हो जाती है तो सेवारत आईएएस अधिकारियों की राज्य में कुल संख्या 246 हो जाएगी. जो कि आवंटित पदों के अनुसार फिर भी रिक्त ही रहेगी. कुछ विद्वानों का यह भी सुझाव है कि अधिकारियों की कमी को पूरा करने के लिए 2008, 2009 और 2010 के बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को भी आईएएस के तौर पर प्रोन्नत किया जाना चाहिए.

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