आये दिन बैंकिंग सेक्टर में घोटालों और वित्तिय अनियिमितताओं की खबरों से ग्राहकों के मन में एक अंदेशा लगा रहता है कि क्या बैंक में उनके पैसे सुरक्षित हैं? एक आम इंसान अपने गाढ़े पसीने की कमाई अपने बच्चों के भविष्य के लिए बैंकों में जमा कराता है यदि वही बैंक आपके लाखों रूपये आपके खाते से उड़ा दे और फिर आपसे बदसलूकी करे तो आपके दिल पर क्या गुजरेगी।
पूर्व ब्रांच मैनेजर की पत्नी के बचत खाते में लगाई सेंध
दि दिल्ली स्टेट कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड नरेला शाखा में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां पूर्व बैंक मैनेजर और नेशनल पब्लिक स्कूल के वर्तमान डायरेक्टर सत्यवीर खत्री की पत्नी श्रीमती कृष्णा खत्री के बचत खाता (संख्या 012005002420) से 20 लाख रूपये अचानक बैंककर्मियों द्वारा उसी ब्रांच के किसी अन्य खाताधारक के खाते में ट्रांसर्फर कर दिया जाता है। यह घटना 30 मई 2016 की है।
बैंक क्लर्क ने कहा गलती से डेबिट हुआ खाता
अपनी पत्नी के बचत खाते से बेवजह 20 लाख की बड़ी रकम कम हुआ देख सत्यवीर खत्री इस बात की पड़ताल करने ब्रांच पहुंचते हैं क्योंकि उनकी पत्नी ने किसी को जब चेक नहीं दिया तो आखिर इतनी बड़ी रकम गई कहां। अपनी पत्नी के खाते से 20 लाख रूपये बेवजह दूसरे के खाते में ट्रांसर्फर करने की बाबत बैंक क्लर्क हरीश सिरोहा से सवाल करते हैं।
बैंक क्लर्क हरीश सिरोहा बताता है कि आपकी पत्नी का बचत खाता 2420 गलती से डेबिट हो गया है और रकम श्रीमती सुुनीता सिन्हा (पति सुखवीर सिंह, एमआईएफ फ्लैट 242, पॉकेट 4, सेक्टर ए-9, डीडीए नरेला) के बचत खाता नं. 012005006469 में गलती से क्रेडिट हो गया है। 
बैंक की प्रबंध निदेशिका ने भी शिकायत पर नहीं दिया ध्यान
बैंक क्लर्क हरीश सिरोहा के जवाब से असंतुष्ट सत्यवीर खत्री ने जब पुलिस कम्पलेन लिखवाने की बात कही तो बैंक क्लर्क हरीश सिरोहा उनके सामने गिड़गिड़ाने लगा और जल्द रकम वापस करने का आश्वासन दिया। चूंकि, सत्यवीर खत्री पहले ब्रांच मैनेजर रह चुके थे सो उन्होंने इसे मानवीय भूल मानते हुए पुलिस कम्पलेन तो नहीं करवाई परन्तु कई महीने बीत जाने के बावजूद जब रकम वापस नहीं मिली तो उन्होंने इस वाकये की शिकायत 20 दिसम्बर 2017 को दि दिल्ली राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड की प्रबंध निदेशिका को भेजी। साथ ही शिकायत की प्रतिलिपि नाबार्ड चेयरमैन, आसीएस नई दिल्ली, आरबीआई शिकायत केन्द्र और डीसीपी नॉर्थ वेस्ट को भी भेजी। परन्तु, कोई ना तो इनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई हुई और ना ही इन्हें कहीं से कोई संतोषजनक प्रत्युतर मिला।
11 महीने बाद मिली रकम पर किसी तीसरे व्यक्ति के खाते के मार्फत
कहीं से कोई कार्रवाई ना होता देख सत्यवीर खत्री ने बैंक क्लर्क हरीश सिरोहा पर अदालती कार्रवाई का दबाव बनाया शुरू किया। जिसके परिणामस्वरूप तकरीबन 11 महीने बाद यानि 07 अप्रैल 2017 को बैंक द्वारा उसी शाखा एक अन्य खाताधारक के अकाउन्ट से 20 लाख 68 हजार 420 रूपये (इन्टरेस्ट समेत) कृष्णा खत्री के खाता में वापस डाल दिया जाता है। जिस खाते से बैंककर्मियों ने श्रीमती कृष्णा खत्री के बचत खाता 2420 में 20 लाख 68 हजार 420 रूपये की रकम वापस डाली उसके खाताधारक का नाम ईश्वर सिंह है। जबकि सत्यवीर खत्री की पत्नी श्रीमती कृष्णा खत्री के बचत खाते से रकम फर्जी तरीके से श्रीमती सुनीता सिन्हा के बचत खाते में डाली गई थी और फिर 11 महीने के बाद बैंक ने किसी तीसरे व्यक्ति ईश्वर सिंह के खाते के माध्यम से श्रीमती कृष्णा खत्री के खाते में रकम वापस डाली। जबकि कायदतन बैंक को श्रीमती सुनीता सिन्हा के खाते से ही रकम वापस करनी चाहिये थी।
इस पूरे वाक्ये में यह सवाल खड़ा होता है बैंक क्लर्क हरीश सिरोहा ने अपने खाता संख्या एसबी 6415 से ईश्वर सिंह के इस बचत खाते में 06 दिसम्बर 2017 को पांच लाख रूपये क्यों जमा करवाये। इससे इस आशंका को भी बल मिलता है कि खाताधारकों के खातों से बड़ी रकम निकालने के लिए बैंक क्लर्क हरीश सिरोहा की कई लोगों के साथ मिलीभगत है या तो फिर इन खाताधारकों को अपने खातों में हो रही लेन-देन की जानकारी ही नहीं है।

पीड़ित का आरोप बैंक मैनेजर राजेश बाला दहिया है घोटाले में शामिल
पीड़ित का आरोप है कि इस पूरे घोटाले में पूर्व ब्रांच मैनेजर राजेश बाला दहिया (जोकि वर्तमान में नरेला अनाज मंडी ब्रांच में कार्यरत है), वर्तमान ब्रांच मैनेजर स्वाती महाजन,
बैंक क्लर्क हरीश सिरोहा और गजेन्द्र सिंह नाम का कर्मचारी शामिल है। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत रजिस्ट्रार आॅफ सोसायटी कार्यालय में भी दर्ज करा दी है। शिकायत में पीड़ित ने दि दिल्ली स्टेट कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड के चेयरमैन बिजेन्द्र सिंह पर भी आरोप लगाया है कि राजेश बाला दहिया से उनकी रिश्तेदारी है इसीलिए उसे बचाने के लिए उसका ट्रांसर्फर आनन-फानन में नरेला अनाज मंडी शाखा में कर दिया गया। और तो और बैंक क्लर्क हरीश सिरोहा के बारे में ब्रांच कोई जानकारी भी नहीं दे रहा।
कई खाताधारकों के खातों से लाखों की रकम हुई लापता
पीड़ित ने रजिस्ट्रार आॅफ सोसायटी को दिये गये शिकायत पत्र में उल्लेख किया है कि इस ब्रांच से विमला देवी (खाता संख्या 7442) से 23 लाख रूपये 12 मई 2016 को, कृष्णा खत्री (खाता संख्या 2420) से 20 लाख रूपये 30 मई 2016 को, सुनीता सिंह (खाता संख्या 6469) से 23 लाख रूपये 12 मई 2016 को, ईश्वर सिंह (खाता संख्या 2180) से 20 लाख रूपये 07 अप्रैल 2017 को अवैध रूप से किसी अन्य खाताधारक के खाते में बिना उक्त खाताधारकों की जानकारी के ट्रांसर्फर कर दिये गये।
पीड़ित का कहना है कि यदि दिल्ली सरकार इस मामले को गंभीरता से लें और ब्रांच के खातों की जांच करवायें तो करोड़ों की हेराफेरी पकड़ी जा सकती है। परन्तु, ना तो बैंक के पदाधिकारी और ना ही स्थानीय पुलिस इस मामले में कुछ कर रही है। पुलिस पीड़ित को अनुसंधान की बात कहकर महीनों से टाल रही है। पीड़ित ने इस मामले में दिल्ली के उप राज्यपाल से गुहार लगाई है कि जनता के पैसों का बंदरबांट कर रहे इन बैंककर्मियों के खिलाफ जांच की जाये और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाये।

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