शेखपुरा : बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के राज्यव्यापी आह्वान पर जिले में कार्यरत सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका और सहायिका अपने विभिन्न मांगों को लेकर 24 मार्च से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चली गयीं. आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका के अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जाने से आंगनबाड़ी केंद्रों में ताले लटक गये हैं.

इस बाबत आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष कमला सिन्हा ने बताया कि उन्हें न तो केंद्र सरकार अपना कर्मचारी मानती है और न राज्य सरकार. आखिर वे कौन-सी सरकार के कर्मचारी हैं. दोनों सरकार फैसला कर ये जरा उनलोगों को बता दे. उन्होंने कहा कि उन्हें मानदेय के रूप में सरकार मात्र 3000 रु देती है और उससे कभी इलेक्शन के दौरान काम लिया जाता है तो कभी अन्य क्षेत्रों में सर्वे का काम लिया जाता है. मतलब 8 घंटे काम के बजाय 16-20 घंटे काम लिया जाता है जिससे उन्हें बच्चों को भी देखभाल का समय नहीं मिल पाता है.

 

इसके एवज में उन्हें 100 रु हर दिन के हिसाब से हर महीने मात्र 3000 रु मानदेय के रूप में दी जाती है जो काफी कम है और सरकारी काम का बोझ ज्यादा है. मंहगाई भी कम नहीं है. ऐसे हालात में गोवा और तेलंगाना की राज्य सरकार की तरह उन्हें भी मानदेय के रूप में 18000 रु दी जाय. उन्हें सरकारी कर्मी की दर्जा मिलना चाहिए. उन्होंने “3000 में दम नही, 18000 से कम नही” नारों के जरिये अपनी भवना को भी उजागर किया. कमला ने कहा कि एक तरफ जिला प्रशासन के अधिकारी आंगनबाड़ी सेविका को गैर आंगनबाड़ी कार्यों की जबाबदेही दे देते हैं और दूसरी तरफ वे ही अधिकारी उनके अनुपस्थिति में उनके केंद्रों का निरीक्षण करने पहुंच जाते हैं.

कम बच्चे उनके गैरमौजूदगी में रहने पर उन्हें चयनमुक्त कर दिया जाता है. जो सेविकाओं के साथ नाइंसाफी है. इन्हीं सब कारणों से अपने 16 सूत्री मांगों को लेकर 24 मार्च से वे सभी आंगनबाड़ी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं. जिलाध्यक्ष कमला ने कहा कि 27 मार्च से 31 मार्च तक सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के सेविका-सहायिका अपने अपने परियोजना कार्यालय के समझ और 3 अप्रैल से 7 अप्रैल तक जिला मुख्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करेगी. साथ ही 10 अप्रैल से मांगों के समर्थन में जेल भरो अभियान किया जाएगा.

उनकी 16 सूत्री मांगों में शामिल है:-

1.अवैध ढंग से आंगनबाड़ी सेविका को चयन रद्द करना बंद किया जाय तथा न्यायिक प्रक्रिया को सुलभ बनाया जाय.
2.गोवा-तेलंगाना राज्य की भांति बिहार सरकार द्वारा भी 7000 रु सेविका को और 4500 रु सहायिका को अतिरिक्त प्रोत्साहन मानदेय राशि दिया जाय.
3. आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देते हुए सेविका को क्लास lll और सहायिका को क्लास iv के रूप में समायोजित किया जाय.
4.जबतक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल जाता है तब तक सेविका को 18000 रु और सहायिका को 10,000 रु मानदेय राशि दिया जाय. साथ ही काम का समय 8 घंटे निर्धारित किया जाय.
5.मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका को भी समान मानदेय राशि व अन्य सुविधा उपलब्ध कराया जाय.

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