नयी दिल्ली :
कहते हैं कि सरकारी नौकरी पाना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन, सरकार ने अब ऐसे कदम उठाए हैं, जिसकी वजह से इसे छोड़नी भी आसान नहीं रहेगा। खासतौर पर तब, जब किसी कॉरपारेट या दूसरी जगह जॉब आॅफर होने की स्थिति में गवर्नमेंट जॉब छोड़नी हो। डिपार्टमेंट आॅफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने अपने एक आदेश में सभी मंत्रालयों और विभागों से कहा है कि वे इस मामले में जारी नये गाइडलाइंस का हर हाल में पालन करें। नौकरी छोड़ने और दूसरी जगह आवेदन करने वालों के खिलाफ सख्ती से फैसला लेने को कहा गया है। डीओपीटी ने अपने निर्देश में कहा है कि सर्विस रूल्स में साफ कहा गया है कि सरकार आम लोगों के हित में सरकारी कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने के ऐप्लिकेशन को रोक भी सकती है। डीओपीटी ने कहा है कि ऐसी कोई नौबत आने पर इस अधिकार का इस्तेमाल किया जाए। डीओपीटी का यह निर्देश प्राइेवट जॉब्स में जाने वालों के अलावा दूसरे विभागों में नयी नौकरी के लिए आवेदन करने या ट्रांसफर पर भी लागू होगा।
डीओपीटी का तर्क है कि किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के हिस्से बहुत सारी जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे में अगर
इस प्रवृत्ति को रोका नहीं गया तो उसका सीधा असर सरकारी काम पर पड़ेगा। इसके अलावा, सरकारी फंड का नुकसान तो है ही। गौरतलब है कि एक आईएएस अधिकारी की ट्रेनिंग में सरकार का करीब 5 लाख रुपये का खर्च आता है। हाल के दिनों में कॉरपोरेट सेक्टर में बेहतर पैकेज और सरकारी नौकरी में काम करने के मुश्किल माहौल इस पलायन की प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं। ब्यूरोक्रेसी के कामों में दखल से दुखी अधिकारियों का भी जॉब छोड़ने का ट्रेंड अचानक बढ़ गया है। पिछले 10 सालों में 674 ए ग्रेड अधिकारियों के अलावा हजारों कर्मचारियों ने सरकारी जॉब छोड़ी हैं।

loading...

LEAVE A REPLY