नयी दिल्ली/अहमदाबाद:
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेद्र मोदी ने वर्ष 2002 में राज्य में हुए साम्प्रदायिक दंगों में क्लीन चिट मिलने पर शुक्रवार को कहा कि इन दंगों ने उन्हें , अंदर तक झकझोर दिया था और अब वह आजाद एवं शांत महसूस कर रहे हंै।
दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के जांच बंद करने के फैसले पर अदालती मुहर लगने के एक दिन बाद श्री मोदी ने अपने ब्लॉग पर लिखा ‘दु:ख, क्षोभ, दर्द, व्यथा, पीड़ा’ उस आमानवीयता को देखकर जो खालीपन महसूस हुआ उसे इन शब्दों मे बयां करना असंभव है। उसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था। उन्होंने अदालत के फैसले पर लिखा , यह प्रकृति का नियम है कि सच की जीत होती है। सत्यमेव जयते। मोदी ने उन्हें दंगों का दोषी बताने वालों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जिस घाव पर उनकी सरकार मरहम लगाने की कोशिश कर रही थी उसे उनके विपक्षी लगातार कुरेदते रहे। उन्होने कहा, संभवत: उन्हें अनुमान नहीं था कि वे किस तरह पहले से ही व्यथित लोगों का दुख बढ़ा रहे हंै लेकिन, गुजरात ने अपनी राह निश्चित कर ली थी। उन्होंने लिखा, हमने हिंसा की बजाय शांति का रास्ता चुना, अनेकता की जगह एकता का रास्ता चुना।
उन्होने लिखा, मैं आजाद और शांत महसूस कर रहा हूं। मंै उन सभी लोगों का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने इस कठिन घड़ी में मेरा साथ दिया। उन्होंने कहा कि संभवत: दूसरो को दुख देने मे आनंद महसूस करने वाले अभी भी उन्हें परेशान करने से नहीं चूकेंगे। उन्होने कहा, लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि अब वे गुजरात के छह प्रमुख लोगों को गैरजिम्मेदाराना तरीके से बदनाम करने से बाज आयेंगे। श्री मोदी ने कहा कि वह अदालत के गुरुवार के फैसले को निजी हार – जीत के रूप में नहीं देख रहे हैं। उन्होंने अपने मित्रों और विरोधियों से भी ऐसा ही करने की अपील की। अहमदाबाद की एक अदालत ने दंगे में मारे गये कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी की याचिका खारिज कर दी थी जिसमें उन्होने उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी की जांच समाप्त करने की रिपोर्ट के खिलाफ अपील की थी। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में श्री मोदी को पाक – साफ बताया था। इन दंगों में एक हजार से ज्यादा लोग मारे गये थे। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार श्री मोदी ने आरोप लगाया कि महज , क्षुद्र निजी और राजनीतिक उद्देश्यों की खातिर, दंगों के लिए उन्हें दोषी ठहराया गया। उन्होंने कहा कि अब जब यह मामला समाप्त हो गया है तो उन्हे याद आ रहा है कि यह सब कैसे शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 के भूकंप ने पहले ही राज्य की कमर तोड़ दी थी। इसके बाद दंगों से राज्य को उबारने के लिए उन्होेने ‘धार्मिक किताबों’ का सहारा लिया।
मोदी ने कहा, मंै जब भी उन व्यथापूर्ण दिनों को याद करता हूं भगवान से यही प्रार्थना करता हूं कि ऐसे बदकिस्मती भरे दिन कभी किसी व्यक्ति, समाज, राज्य या देश के सामने न आये। अदालत के फैसले पर उन्होने लिखा कि आज वह संतुष्ट है और हर एक गुजराती को इसका श्रेय जाता है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार दंगों से जिस तरह निपटी, यह देश में अपनी तरह का पहला उदाहरण था।

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