नई दिल्ली: नोटबंदी के दौरान बैंक खातों में अघोषित नकदी जमा की पड़ताल कराने के लिए आयकर विभाग आपरेशन क्लीन मनी का दूसरा चरण अगले महीने मार्च में शुरू कर सकता है। माना जा रहा है कि इस चरण में 5 लाख से कम नकदी जमा कराने वालों को जांच के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। आयकर विभाग इस काम के लिए अगले 10 दिनों के भीतर दो डेटा एनालिस्ट फर्मों की नियुक्ति करेगा जो कि 8 नवंबर 2016 से पहले और उसके बाद बैंक खातों में जमा की गई नकदी की जांच करेंगे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल 8 नवंबर को ही नोटबंदी का फैसला लिया था जिसमें बाजार में प्रचलित 86 फीसद करेंसी (500 और 1000 रुपए के पुराने नोट) अमान्य हो गई थी। एक अधिकारी ने बताया कि विभाग की इस कवायद का उद्देश्य उस व्यक्ति के अनेक बैंक खातों या पैन नंबरों को आपस में जोड़ना है जिसने इस अवधि के दौरान बड़ी संख्या में नकदी जमा करवाई है। आयकर विभाग ने समान पते, पैन संख्या, टेलीफोन नंबर, ईमेल पते या नाम जैसी समानता के आधार पर विभिन्न जमाओं में तार जोड़ने की कोशिश शुरू की है। अधिकारी ने बताया कि कम राशि वाली एकल जमा को जांच के दायरे में नहीं रखा जाएगा। वहीं अधिकारी ने यह भी बताया कि एकल आधार पर पांच लाख रुपए से कम राशि वाली जमाओं की फिलहाल अनदेखी हो सकती है।
विभाग ने क्यों शुरू किया ऑपरेशन क्लीन मनी:
नोटबंदी के दौरान बैंक खातों में भारी जमाओं के मद्देनजर संभावित कर चोरी को पकड़ने के लिए आयकर विभाग ने आपरेशन क्लीन मनी शुरू किया। इसके तहत पांच लाख रुपए से अधिक की संदिग्ध जमा करवाने वाले 18 लाख लोगों को एसएमएस, ईमेल भेजे गए, जिसमें से 9 लाख को संदिग्ध पाया गया।

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